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डीजीपी के सख्त निर्देशों के बावजूद जिले में जारी फर्जी मुकदमों का खेल, पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार

फतेहपुर। जनपद में फर्जी मुकदमे दर्ज कराने और उन्हें दबाव व साजिश का हथियार बनाकर इस्तेमाल करने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। यह स्थिति तब है जब उच्च स्तर से, विशेषकर डीजीपी प्रयागराज द्वारा, ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है। जानकारी के अनुसार, जिले में कई ऐसे लोग सक्रिय हैं जो फर्जी मुकदमे दर्ज कराना अपनी “कला” समझते हैं। पहले पुलिस और मीडिया को भ्रमित कर अपने पक्ष में माहौल बनाया जाता है और उसके बाद सुलह-समझौते के नाम पर आर्थिक लाभ लेने का खेल शुरू हो जाता है। कई मामलों में यह भी आरोप है कि एससी/एसटी एक्ट की धाराओं का भय दिखाकर लोगों को समझौते के लिए मजबूर किया जाता है। इसी कड़ी में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पीड़ित विनोद कुमार पुत्र सावल दास, निवासी थाना राधानगर, ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ दर्ज किया गया मुकदमा पूरी तरह से झूठा, मनगढ़ंत और दबाव बनाने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया है।

पीड़ित के अनुसार, मुकदमे का वादी सोनू एक दबंग और आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है, जो अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों को ब्याज पर पैसा देकर, छल-कपट और कूट रचना के माध्यम से उनकी संपत्तियों पर कब्जा करने का कार्य करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे गिरोह में कुछ कथित रूप से कानूनी जानकारी रखने वाले लोग भी शामिल हैं, जो तकनीकी पहलुओं का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाने में मदद करते हैं। विनोद कुमार ने बताया कि उन्होंने पहले भी सोनू और उसके भाई शिव मोहन के खिलाफ थाना कोतवाली में मुकदमा संख्या 314/2024, धारा 420, 406, 323, 504, 506 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस द्वारा पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है और मामला वर्तमान में माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, फतेहपुर की अदालत में विचाराधीन है।

पीड़ित का आरोप है कि उसी मुकदमे में गवाह रहे इस्लाम अहमद को भी अब एक नई साजिश के तहत झूठे मुकदमे में फंसाया गया है, ताकि पुराने मामले में दबाव बनाकर समझौता कराया जा सके। उन्होंने बताया कि बैंक से निकाले गए 20 लाख रुपये को लेकर जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह भ्रामक हैं। यह धनराशि एक संयुक्त खाते से निकाली गई थी, जिसे इस्लाम अहमद और वादी के पिता द्वारा मिलकर संचालित किया जाता था। पीड़ित के अनुसार, यह रकम व्यापारिक लेन-देन के तहत इस्लाम अहमद का वैध हिस्सा थी, जिसे वादी के पिता की सहमति से उनके जीवनकाल में ही निकाला गया था। इतना ही नहीं, पीड़ित का दावा है कि अभी भी करीब 11 लाख रुपये इस्लाम अहमद को मिलने बाकी हैं, जिन्हें वादी द्वारा हड़प लिया गया है। आरोप यह भी है कि फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देकर पीड़ितों से अतिरिक्त 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी जा रही है। पीड़ित का कहना है कि इस तरह के दबाव और मानसिक उत्पीड़न के कारण कई लोग आत्महत्या जैसे कदम उठाने तक को मजबूर हो जाते हैं।

विनोद कुमार ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि हाल ही में ग्राम चौफेरवा में हुई ट्रिपल हत्या की घटना में भी इसी प्रकार के विवाद और दबाव की भूमिका रही है। उन्होंने आशंका जताई है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तथा उन्हें और इस्लाम अहमद को आरोपी पक्ष से जान-माल का खतरा होने के चलते सुरक्षा प्रदान की जाए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और डीजीपी स्तर से जारी निर्देशों को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।

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