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श्रीमद्भागवत कथा का समापन, प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

– कथा के बाद भक्तों ने भंडारे का प्रसाद चखा
– श्रीमद भागवत कथा में प्रवचन करते भगवताचार्य।
खागा, फतेहपुर। क्षेत्र के किशुनदासपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन भक्ति और श्रद्धा के वातावरण में हुआ। कथा के अंतिम दिन रायबरेली से आए भागवताचार्य बद्री विशाल ओझा ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए कंस वध एवं कृष्ण-सुदामा प्रसंग का भावपूर्ण रसपान कराया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। भागवताचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अधर्म और अत्याचार का अंत करने के लिए कंस का वध किया। यह प्रसंग हमें सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। वहीं कृष्ण-सुदामा की मित्रता का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और समर्पण का महत्व होता है। भगवान अपने भक्तों और मित्रों के प्रति सदैव कृपालु रहते हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर भगवान की लीलाओं का श्रवण करते रहे। भजनों और संकीर्तन के बीच श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से झूमकर भगवान का गुणगान किया। समापन अवसर पर विशेष आरती और प्रसाद वितरण का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया। इसके बाद आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने सभी अतिथियों, कथा व्यास एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर यजमान ज्ञानेंद्र उर्फ मुन्ना श्रीवास्तव, विपुल श्रीवास्तव, आशीष श्रीवास्तव सहित कृष्ण भक्त उपस्थित रहे।

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