फतेहपुर। उत्तम उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में आयोजित भव्य ‘श्रीराम कथा’ में हनुमत चरित एवं माता शबरी के प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण और सजीव वर्णन किया गया। कथा व्यास परम श्रद्धेय श्री चंदन कृष्ण जी महाराज ने प्रभु श्रीराम के प्रति हनुमान जी के निस्वार्थ समर्पण तथा माता शबरी की अटूट भक्ति का वर्णन कर पाण्डाल में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा के दौरान ‘हनुमत चरित’ मुख्य केंद्र रहा। कथावाचक ने बताया कि हनुमान जी केवल अपार शक्ति के प्रतीक ही नहीं, बल्कि बुद्धि, विवेक और विनम्रता के भी अद्भुत संगम हैं। ऋष्यमूक पर्वत पर ब्राह्मण वेश में प्रभु श्रीराम से उनकी पहली भेंट को शरणागति की पराकाष्ठा बताया गया। लंका दहन से लेकर लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा हेतु द्रोणागिरी पर्वत उठाने तक, हनुमान जी के प्रत्येक कार्य में ‘राम काज’ के प्रति उनकी अटूट निष्ठा झलकती है। कथा में यह संदेश दिया गया कि अपार शक्ति होने के बावजूद व्यक्ति को सदैव विनम्र और सेवाभावी बने रहना चाहिए। माता शबरी के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से भावुक कर दिया। उनकी मनमोहक झांकी के दौरान पूरा पाण्डाल ‘राम नाम’ के जयघोष से गूंज उठा। शबरी द्वारा प्रतिदिन अपनी कुटिया को साफ करना और मीठे बेर चुनकर प्रभु की प्रतीक्षा करना अटूट विश्वास का प्रतीक बताया गया। प्रभु श्रीराम द्वारा शबरी के जूठे बेर ग्रहण करने की कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ईश्वर केवल भाव के भूखे होते हैं, वे जाति या कुल नहीं देखते। भगवान राम द्वारा शबरी को दिए गए ‘नवधा भक्ति’ के उपदेश को भी कथा में विस्तार से समझाया गया। कथा के मध्य भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे, वहीं हनुमान जी और माता शबरी के सजीव पात्रों की प्रस्तुति ने आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक दिव्य बना दिया। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में संत शिरोमणि श्री श्री 1008 श्री राम नारायण दास त्यागी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए। इस अवसर पर धनंजय मिश्रा, मनोज साहू, आकाश भदौरिया, जय किशन, श्रवण दीक्षित, अनिल महाजन, प्रेमदत्त उमराव, संदीप श्रीवास्तव, गंगाशरण करवरिया, संजय सिंह, सोनू शुक्ला, सनी, सौरभ गुप्ता सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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