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अपने ही हाथों उजड़ते सपने: मेरठ में दुकानदारों ने खुद ही तोड़ी अपनी दुकानें, चला रहे हथौड़ा

मेरठ: इंसान अपनी पूरी उम्र एक-एक ईंट जोड़कर अपने सपनों का आशियाना और कारोबार खड़ा करता है लेकिन हमने जिन दुकानों को अपने खून-पसीने से सींचा था आज हाथों में हथौड़ा थामकर उन्हें जमींदोज करना पड़ रहा है।अपने ही सपनों को अपने ही हाथों से तोड़ना विभीषिका से कम नहीं है। यह कहना है मेरठ के सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों का। इन दिनों बाजार की गलियों में हथौड़ों की चोट की आवाज गूंज रही है इस चोट से ईंट-पत्थरों की इमारतों के साथ व्यापारियों के दिल और उम्मीदें भी टूट रही हैं।आवास एवं विकास परिषद की ओर से शास्त्रीनगर स्कीम नंबर सात की 859 संपत्तियों की सूची सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी।  स्कीम के तहत ये संपत्तियां आवासीय हैं लेकिन इनका व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास विकास ने 44 भवनों को सील कर दिया था। वहीं बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक यानी इमारत के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह में हुए निर्माण को दो महीने के भीतर तोड़ने का आदेश दिया है।ऐसे में अब व्यापारियों ने भारी मन से खुद ही ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया है। अलंकार साड़ी के संचालक राजीव गुप्ता ने बताया इस बाजार की नींव मेहनत और संघर्ष पर टिकी है। यहां बड़ी संख्या में पंजाबी समाज के दुकानदार हैं, जिनमें कई ऐसे परिवार भी हैं जो विभाजन के बाद पाकिस्तान से आकर यहां बसे थे।

करीब 35-40 साल पहले जब शास्त्रीनगर एक तरह से जंगल था और शाम होते ही लोग इधर आने से कतराते थे तब इन व्यापारियों ने तखत और फोल्डिंग पलंग पर फड़ लगाकर काम शुरू किया था। पाई-पाई जोड़कर उन्होंने अल्प आय वर्ग (एलआईजी) के भवन लिए और जीवनयापन के लिए उनमें छोटी-छोटी दुकानें खोलीं। व्यापारियों का कहना है कि उनकी मेहनत और मशक्कत ने ही इस सुनसान इलाके को बाजार की पहचान दिलाई जिससे शास्त्रीनगर आज शहर के पॉश इलाकों में गिना जाता है। अपने उस संघर्ष को याद कर दुकानदारों की आंखों से आंसू बह निकलते हैं।

वे मौजूदा हालात के लिए सीधे तौर पर आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। व्यापारियों का तर्क है कि अधिकारियों की मिलीभगत और शह के बिना आवासीय क्षेत्र कभी बाजार में तब्दील नहीं हो सकता था।दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस कारोबार को खड़ा करने में पूरी उम्र गुजार दी, उसे इस तरह नेस्तनाबूत होते देखना पड़ेगा। वर्षों की मेहनत से तैयार की गई दुकानों को अब खुद ही श्रमिकों से तुड़वाना पड़ रहा है। अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए व्यापारी अब सिर्फ अपने उजड़ते आशियानों और रोजगार को बेबसी से देख रहे हैं।

पोस्टर हटवाने पर हुई झड़प

सेंट्रल मार्केट में लगे पलायन के पोस्टर हटवाने के लिए नौचंदी पुलिस मौके पर पहुंची। जिसके बाद वहां हंगामा हो गया। लोगों ने पुलिस का विरोध किया। अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने भी पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध जताया। सचिन सिरोही ने कहा कि व्यापारियों का उत्पीड़न हो रहा है और नौचंदी पुलिस उन्हें ही मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दे रही है। सिरोही ने कहा कि वह मुकदमे से डरने वाले नहीं है। वह व्यापारियों के साथ खड़े हैं। पुलिस से झड़प के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

माननीयों के लापता के पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल

मेरठ के सेंट्रल मार्केट के व्यापारी अपनी दुकान और व्यापार चौपट होने से गमजदा हैं। व्यापारियों में सबसे ज्यादा गुस्सा भाजपा के जनप्रतिनिधियों के रवैये से है। बुधवार को 44 संपत्तियों पर सीलिंग के दौरान भी किसी भी भाजपा नेता के न पहुंचने से लोग आक्रोशित रहे। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर भाजपा के जनप्रतिनिधियों के लापता लिखे हुए पोस्ट वायरल हुए। इसमें सांसद, मंत्री, विधायक, महापौर के साथ ही मेरठ से जुड़े पार्टी के आला नेताओं के भी फोटो लगे हैं। तमाम लोग इन पर कमेंट कर अपना गुस्सा बयां कर रहे हैं।

व्यापारियों के पक्ष में आए किसान

भारतीय किसान यूनियन धनसिंह कोतवाल के किसानों ने शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने अधिकारियों को ज्ञापन देकर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को राहत दिए जाने की मांग की। यह प्रदर्शन जिलाध्यक्ष अभिषेक चपराना के नेतृत्व में हुआ।किसानों ने सीलिंग की कार्रवाई का विरोध किया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन गुर्जर के निर्देश पर कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान प्रदेश प्रवक्ता जितेंद्र शर्मा, आकाश चपराना, रोहित कुमार, रोबिन और निशांत भी मौजूद रहे। किसानों ने व्यापारियों के हित में तत्काल कदम उठाने की अपील की।

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