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E-20 पेट्रोल पर फैल रही अफवाहों को ISMA ने बताया भ्रामक, कहा- वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम

नई दिल्ली। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने ई-20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विभिन्न दावों को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। एसोसिएशन ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि ई-20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन खराब होने, ईंधन में कीड़े-मकोड़े आने, वाहन बीमा या वारंटी समाप्त होने तथा पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाने जैसे दावे वैज्ञानिक तथ्यों और तकनीकी परीक्षणों के विपरीत हैं।

आईएसएमए के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वर्षों के वैज्ञानिक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और विभिन्न सरकारी एजेंसियों, तेल विपणन कंपनियों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं तथा अनुसंधान संस्थानों की सहभागिता के बाद लागू किया गया है। ऐसे में बिना किसी प्रमाण के फैलाए जा रहे भ्रम न केवल आम उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रम को भी प्रभावित कर सकते हैं।

आईएसएमए ने स्पष्ट किया कि ई-20 पेट्रोल को लेकर हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई भ्रामक वीडियो और पोस्ट साझा किए जा रहे हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचाता है, पेट्रोल टैंक के पास चींटियां और अन्य कीड़े आकर्षित होते हैं, बीमा कंपनियां ऐसे ईंधन के उपयोग पर दावा स्वीकार नहीं करतीं तथा पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाया जाता है। एसोसिएशन ने कहा कि इनमें से किसी भी दावे का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

बयान में कहा गया कि ईंधन ग्रेड एथेनॉल एक नियंत्रित औद्योगिक प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाता है। यह किण्वन (Fermentation) और आसवन (Distillation) जैसी प्रक्रियाओं से गुजरता है, जिसके बाद इसमें किसी प्रकार की शर्करा शेष नहीं रहती। यही कारण है कि चींटियों या अन्य कीड़ों के आकर्षित होने का दावा पूरी तरह निराधार है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) भी पहले स्पष्ट कर चुका है कि ईंधन ग्रेड एथेनॉल में अवशिष्ट शर्करा नहीं होती और उसमें ऐसे तत्व मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं।

आईएसएमए ने यह भी कहा कि वाहन निर्माताओं, तेल कंपनियों तथा परीक्षण एजेंसियों द्वारा ई-20 ईंधन पर व्यापक परीक्षण किए जा चुके हैं। सरकार के अनुसार, ई-20 पेट्रोल लागू होने के बाद इंजन फेल होने या बड़े पैमाने पर वाहन खराब होने जैसी कोई प्रमाणित घटना सामने नहीं आई है। ऑटोमोबाइल उद्योग की संस्थाएं भी स्पष्ट कर चुकी हैं कि निर्धारित मानकों के अनुरूप ई-20 ईंधन का उपयोग करने से वाहन की वारंटी स्वतः समाप्त नहीं होती।

एसोसिएशन ने कहा कि कुछ वायरल वीडियो में यह भी दिखाया जा रहा है कि पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाया जा रहा है। आईएसएमए ने इसे पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि एथेनॉल गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस), मक्का, टूटे चावल सहित विभिन्न कृषि उत्पादों से औद्योगिक प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है। तैयार होने के बाद इसका रासायनिक स्वरूप मूल कृषि उत्पाद से पूरी तरह अलग होता है और यह निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के बाद ही पेट्रोल में मिश्रित किया जाता है।

आईएसएमए के अनुसार, भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण देश को अब तक बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध हुआ है।

एसोसिएशन ने बताया कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ब्राजील, जापान, कनाडा और कई यूरोपीय देशों में वर्षों से विभिन्न अनुपात में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। ब्राजील में तो भारत से अधिक प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन लंबे समय से प्रयोग में है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह तकनीक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य और सुरक्षित है।

आईएसएमए ने नागरिकों, मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे ई-20 पेट्रोल से संबंधित किसी भी जानकारी पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक स्रोतों और वैज्ञानिक तथ्यों की जांच करें। संस्था का कहना है कि देश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान और किसानों के हितों से जुड़े इस कार्यक्रम पर चर्चा तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए, न कि अफवाहों और भ्रामक दावों के आधार पर।

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