लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी स्थित अवैध व्यावसायिक भवन में 22 जून को लगी भीषण आग के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच लगभग पूरी हो गई है। जांच में प्रशासनिक लापरवाही और अवैध निर्माण को संरक्षण देने के गंभीर संकेत मिलने के बाद एसआईटी ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में विभिन्न समय पर तैनात रहे 9 आईएएस और 9 पीसीएस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश की है। यह मामला प्रदेश के प्रशासनिक महकमे में हलचल का कारण बन गया है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी ने आग लगने के कारणों के साथ-साथ भवन के निर्माण, मानचित्र स्वीकृति, निरीक्षण, अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की भी गहन जांच की। जांच के दौरान यह पाया गया कि संबंधित भवन में कई स्तरों पर नियमों की अनदेखी की गई थी और समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते अवैध निर्माण लगातार संचालित होता रहा।
एसआईटी की रिपोर्ट में जिन अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की गई है, वे विभिन्न समय पर लखनऊ विकास प्राधिकरण में तैनात रहे हैं। इनमें कुछ अधिकारी वर्तमान में जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, कुछ अभी भी एलडीए में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, जबकि दो अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा समय पर प्रभावी कार्रवाई की गई होती, तो अवैध निर्माण को रोका जा सकता था और ऐसी गंभीर घटना की आशंका काफी हद तक टाली जा सकती थी।
जानकारी के अनुसार, एसआईटी ने अपनी जांच में भवन निर्माण से जुड़े अभिलेख, स्वीकृत मानचित्र, निरीक्षण रिपोर्ट, विभागीय पत्राचार, अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट तथा संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान की गई कार्रवाई का विस्तृत परीक्षण किया। जांच में यह भी देखा गया कि किन अधिकारियों के कार्यकाल में अवैध निर्माण हुआ, किस स्तर पर शिकायतें प्राप्त हुईं और उनके निस्तारण में क्या कदम उठाए गए।
सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट लगभग तैयार हो चुकी है और जल्द ही इसे उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दिया जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद नियुक्ति विभाग संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर सकता है। यदि अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई, अनुशासनात्मक कार्यवाही अथवा अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में यह पहला ऐसा मामला माना जा रहा है जिसमें किसी बड़े अग्निकांड की जांच के दौरान एक साथ बड़ी संख्या में आईएएस और पीसीएस अधिकारियों की भूमिका की जांच की गई है। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि सरकार अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में जवाबदेही तय करने के पक्ष में है।
गौरतलब है कि 22 जून को अलीगंज सेक्टर-डी स्थित बहुमंजिला भवन में भीषण आग लग गई थी। आग इतनी भयावह थी कि उसे बुझाने के लिए दमकल विभाग की कई गाड़ियों को घंटों तक मशक्कत करनी पड़ी। घटना के बाद भवन की वैधता, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण संबंधी नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि भवन में अग्निशमन सुरक्षा के आवश्यक मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा भवन के उपयोग और स्वीकृत मानचित्र के बीच भी कई स्तरों पर विसंगतियां मिलने की बात सामने आई है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है।
अब शासन स्तर पर एसआईटी रिपोर्ट का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष लिया जाएगा। शासन के निर्णय के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय होगी। प्रशासनिक हलकों में इस मामले को प्रदेश में अवैध निर्माण के खिलाफ सरकार की सबसे बड़ी जवाबदेही तय करने वाली कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
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