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दिल्ली में आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई तेज, पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी मॉड्यूल से जुड़े तार खंगाल रही जांच एजेंसी

लखनऊ। दिल्ली में हाल ही में आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच और तेज कर दी है। इसी क्रम में एटीएस ने 17 जून को बुलंदशहर से गिरफ्तार किए गए मोहम्मद उमर और फैजान से मंगलवार को गहन पूछताछ की। दोनों आरोपियों को विशेष अदालत ने पांच दिन की पुलिस रिमांड पर एटीएस के हवाले किया है, ताकि उनसे नेटवर्क, संपर्कों और गतिविधियों के संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई जा सके।

जांच एजेंसियों के अनुसार, मोहम्मद उमर और फैजान को 17 जून को बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। एटीएस का आरोप है कि दोनों पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के माध्यम से आईएसआई के लिए काम कर रहे थे। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दोनों के संपर्क किन-किन लोगों से थे, उन्हें किस प्रकार के निर्देश दिए जाते थे और उनके जरिए किस तरह की गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बनाई जा रही थी।

दिल्ली में हाल ही में हुई आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण इनपुट मिले हैं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर उत्तर प्रदेश एटीएस ने भी अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है। अधिकारियों का मानना है कि विभिन्न राज्यों में सक्रिय संदिग्ध मॉड्यूल के बीच आपसी संपर्क हो सकते हैं, इसलिए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, रिमांड के दौरान एटीएस दोनों आरोपियों से उनके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल संचार, बैंक लेनदेन, विदेशी संपर्कों और कथित हैंडलरों के बारे में पूछताछ करेगी। इसके अलावा यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या दोनों ने किसी अन्य व्यक्ति को इस नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास किया था या किसी संवेदनशील स्थान की जानकारी साझा की थी।

जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के माध्यम से आईएसआई का नेटवर्क भारत में किस तरह सक्रिय था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ने और गोपनीय सूचनाएं जुटाने की कोशिश की जा सकती है। इसी कारण डिजिटल साक्ष्यों की भी गहन जांच की जा रही है।

एटीएस अधिकारियों के मुताबिक, रिमांड के दौरान मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे अन्य संदिग्धों से पूछताछ या कार्रवाई भी की जा सकती है। यदि जांच में किसी और व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विभिन्न केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच भी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है।

विशेष अदालत द्वारा पांच दिन की रिमांड दिए जाने के बाद एटीएस को उम्मीद है कि पूछताछ से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आएंगी। जांच एजेंसी आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड का फॉरेंसिक विश्लेषण भी करा रही है, ताकि कथित नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाया जा सके।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते समय में आतंकी संगठन और विदेशी खुफिया एजेंसियां डिजिटल माध्यमों का अधिक इस्तेमाल कर रही हैं। ऐसे में सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों की निगरानी जांच का अहम हिस्सा बन गई है। यही कारण है कि एटीएस तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर जांच को आगे बढ़ा रही है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां रिमांड के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और आरोपियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा। तब तक मामले में किसी भी नए खुलासे पर आधिकारिक पुष्टि के बाद ही जानकारी साझा की जाएगी।

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