अंकारा। नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के 32 सदस्य देशों का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन मंगलवार को तुर्किये की राजधानी अंकारा में शुरू हो गया। सम्मेलन की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यूरोपीय सहयोगी देशों से अपनी रक्षा पर अधिक खर्च करने और सुरक्षा की जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा स्वयं उठाने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच नाटो देशों ने अरबों डॉलर के नए हथियार और रक्षा उपकरण खरीद समझौतों की घोषणा कर यह संकेत देने का प्रयास किया कि वे रक्षा निवेश बढ़ाने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहे हैं।
शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित नाटो डिफेंस इंडस्ट्री फोरम में महासचिव Mark Rutte ने कई बड़ी रक्षा परियोजनाओं और बहुराष्ट्रीय खरीद समझौतों की घोषणा की। इन समझौतों की कुल कीमत अरबों डॉलर बताई गई है। इसमें समुद्री निगरानी के लिए आधुनिक ड्रोन, हवाई निगरानी विमान, टैंकर विमानों के बेड़े का विस्तार, ड्रोन रोधी प्रणालियों में निवेश और रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसी कई पहलें शामिल हैं।
मार्क रूट ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा वातावरण में नाटो को अपने रक्षा उद्योग में “क्रांति” लानी होगी। उन्होंने कहा कि केवल अधिक धन खर्च करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हथियारों के उत्पादन, तकनीकी नवाचार और सहयोगी देशों के बीच संयुक्त खरीद प्रणाली को भी तेज करना होगा। उन्होंने रूस के साथ-साथ चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के बढ़ते रक्षा निवेश को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि नाटो को भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।
इस बार का शिखर सम्मेलन कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर हैं। उनका मानना है कि नाटो सहयोगियों को अपने रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि करनी चाहिए ताकि सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था अधिक संतुलित बन सके। सम्मेलन में यूरोपीय देशों ने रक्षा निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए नए सैन्य खरीद कार्यक्रमों की घोषणा की है।
सम्मेलन में यूक्रेन को जारी सैन्य सहायता भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच नाटो देशों ने यूक्रेन को दी जा रही रक्षा सहायता जारी रखने और उसकी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही यूरोप की सामूहिक सुरक्षा, आधुनिक सैन्य तकनीक, साइबर सुरक्षा, ड्रोन युद्ध और रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी विस्तृत चर्चा हो रही है।
नाटो महासचिव ने रक्षा उद्योग और निजी क्षेत्र से भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सरकारों और रक्षा कंपनियों को पहले से अधिक तेज़ी और समन्वय के साथ काम करना होगा। इसी उद्देश्य से नाटो ने उद्योग और सैन्य जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय के लिए नई पहलें भी शुरू की हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंकारा शिखर सम्मेलन केवल रक्षा बजट बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नाटो की भविष्य की रणनीति तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच भी है। बदलते भू-राजनीतिक हालात, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच नाटो अपनी सैन्य और औद्योगिक क्षमता को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है।
सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष सामूहिक सुरक्षा, सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग में निवेश, नई तकनीकों के विकास और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श करेंगे। माना जा रहा है कि सम्मेलन के समापन पर जारी होने वाले संयुक्त घोषणा-पत्र में रक्षा खर्च बढ़ाने, यूक्रेन के समर्थन और नाटो की सामूहिक सुरक्षा प्रतिबद्धता को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
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