अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार गणना कार्य में लगे कर्मचारियों ने लगातार चोरी की और उन्हें यह सहूलियत सुरक्षा व तलाशी व्यवस्था में ढील के कारण मिली। सबसे अहम खुलासा यह है कि गणना कक्ष में आने-जाने वाले व्यक्तियों की तलाशी को लेकर पहले जो सख्त व्यवस्था निर्धारित थी, उसे बाद में जारी एसओपी में शिथिल कर दिया गया।
एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट बताती है कि 20 सितंबर 2024 को गणना कक्ष में आने-जाने वाले व्यक्तियों के संबंध में एक निर्धारित व्यवस्था बनाई गई थी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह था कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, चोरी या अनियमितता न हो सके। इसके तहत गणना कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलने वाले लोगों पर कड़ी निगरानी रखे जाने की व्यवस्था थी।
लेकिन छह फरवरी 2025 को जारी नई एसओपी में तलाशी के प्रावधान को नियमित रूप से कराने के बजाय औचक यानी रेंडम तलाशी के रूप में बदल दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार इसी बदलाव से सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हुई और गणना कर्मचारियों को चोरी करने का अवसर मिला। पहले जहां प्रत्येक व्यक्ति की व्यवस्थित तलाशी की व्यवस्था थी, वहीं नई एसओपी के बाद तलाशी व्यवस्था नियमित न रहकर चयनित या औचक जांच तक सीमित हो गई।
एसआईटी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में इस बदलाव को गंभीर लापरवाही माना है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि यदि तलाशी व्यवस्था पहले की तरह सख्त और नियमित रहती तो चढ़ावे की चोरी को रोका जा सकता था। गणना कर्मचारियों ने इसी शिथिलता का फायदा उठाया और लगातार चढ़ावे की रकम में हेराफेरी की।
राम मंदिर जैसे अत्यंत संवेदनशील और आस्था से जुड़े स्थल पर चढ़ावे की गणना एक बेहद महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है। देश-विदेश से श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे की पारदर्शी गणना और सुरक्षा व्यवस्था पर किसी भी प्रकार की लापरवाही श्रद्धालुओं के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि छह फरवरी 2025 को जारी एसओपी में तलाशी व्यवस्था को शिथिल करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया। क्या इस बदलाव से पहले सुरक्षा जोखिमों का आकलन किया गया था या नहीं। यदि गणना कक्ष जैसे संवेदनशील स्थान पर नियमित तलाशी की व्यवस्था को रेंडम तलाशी में बदला गया, तो इसकी जिम्मेदारी किन अधिकारियों या कर्मचारियों पर तय होगी।
एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि चोरी कोई एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि यह क्रम लगातार चलता रहा। इसका अर्थ है कि निगरानी व्यवस्था में लंबे समय तक कमजोरी बनी रही। यदि समय रहते गड़बड़ी पकड़ ली जाती तो चढ़ावे की रकम को नुकसान से बचाया जा सकता था।
मामले में अब जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी में केवल गणना कर्मचारी शामिल थे या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि एसओपी में बदलाव के बाद किसे क्या जिम्मेदारी दी गई थी और किस स्तर पर निगरानी में चूक हुई।
सूत्रों के अनुसार अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर आगे विभागीय कार्रवाई और आपराधिक जांच दोनों तेज हो सकती हैं। संबंधित कर्मचारियों, पर्यवेक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ की जा सकती है। गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर, प्रवेश-निकास विवरण और चढ़ावे की गणना संबंधी अभिलेखों की भी जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले ने मंदिर प्रशासन की आंतरिक व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े चढ़ावे की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में किसी भी नियम में ढील देना या जांच प्रक्रिया को कमजोर करना बेहद गंभीर माना जाएगा।
अब देखना होगा कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में किन-किन लोगों की भूमिका तय होती है और चढ़ावा चोरी मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल अंतरिम रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि तलाशी व्यवस्था में शिथिलता ही इस चोरी की सबसे बड़ी वजहों में से एक रही।
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