नई दिल्ली। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने पूरे देश में रफ्तार पकड़ ली है। राजधानी दिल्ली, मुंबई, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है। लगातार हो रही वर्षा से जहां भीषण गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर जलभराव, ट्रैफिक जाम और परिवहन व्यवस्था पर व्यापक असर देखने को मिला है। कई शहरों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जिससे लाखों लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ा। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं, जिससे वाहन रेंगते नजर आए। निचले क्षेत्रों में पानी भर जाने के कारण लोगों को घरों से निकलने में परेशानी हुई। लोकल ट्रेन सेवाएं कुछ स्थानों पर प्रभावित रहीं, जबकि उड़ानों के संचालन पर भी असर पड़ा। प्रशासन ने लोगों से आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलने की अपील की है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में मंगलवार सुबह हुई तेज बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया, लेकिन इसके साथ ही कई इलाकों में जलभराव और लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला। प्रमुख मार्गों पर वाहन घंटों फंसे रहे। कुछ स्थानों पर पेड़ गिरने और उड़ानों के प्रभावित होने की भी खबरें सामने आईं। मौसम विभाग ने दिल्ली-एनसीआर के लिए अलर्ट जारी करते हुए अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है।
हरियाणा और पंजाब में भी मानसून ने जोरदार दस्तक दी है। कई जिलों में लगातार बारिश के चलते खेतों और सड़कों पर पानी भर गया है। किसानों ने बारिश का स्वागत किया है क्योंकि इससे खरीफ फसलों को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि शहरी क्षेत्रों में जलनिकासी की व्यवस्था कमजोर होने के कारण लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार इन राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी वर्षा का दौर जारी रह सकता है।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी मानसून सक्रिय हो चुका है। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रुक-रुक कर तेज बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी, जबकि किसानों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों का कहना है कि समय पर हुई वर्षा धान और अन्य खरीफ फसलों के लिए काफी लाभदायक साबित होगी।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार जून महीने में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह से मानसून ने गति पकड़ ली है। इसके चलते उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में व्यापक वर्षा हो रही है। मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज हवाओं और बिजली गिरने की संभावना व्यक्त की है।
बारिश के कारण महानगरों में ट्रैफिक व्यवस्था सबसे अधिक प्रभावित हुई। कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, स्कूली बच्चे और आम नागरिक घंटों जाम में फंसे रहे। कई स्थानों पर वाहन पानी में बंद हो गए, जिससे सड़कें और अधिक बाधित हो गईं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने जलभराव और ट्रैफिक जाम की तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिनमें प्रमुख शहरों की सड़कें पानी से लबालब दिखाई दीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हर वर्ष मानसून के दौरान बड़े शहरों में जलनिकासी की व्यवस्था की पोल खुल जाती है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद थोड़ी देर की बारिश में ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। शहरी नियोजन और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत किए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
इस बीच प्रशासन ने नगर निकायों, आपदा प्रबंधन टीमों और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा है। जलभराव वाले क्षेत्रों में पंपिंग सेट लगाए जा रहे हैं और सड़कों से पानी निकालने का कार्य तेज कर दिया गया है। बिजली विभाग को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बारिश के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से परहेज करें और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों पर न रहें। वाहन चालकों को भी सावधानीपूर्वक वाहन चलाने और मौसम संबंधी ताजा अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
हालांकि बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत दी है, लेकिन इसके साथ ही शहरी अव्यवस्था और कमजोर बुनियादी ढांचे की चुनौतियां भी एक बार फिर सामने आ गई हैं। आने वाले दिनों में मानसून और सक्रिय रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के लिए राहत और बचाव कार्यों को तेज रखना तथा नागरिकों के लिए सतर्कता बरतना बेहद जरूरी होगा।
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