नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में महज 24 घंटे के भीतर तीन व्यावसायिक तेल टैंकरों पर हुए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं ने न केवल युद्धविराम की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर भी नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं।
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी (UKMTO) के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के आसपास तीन अलग-अलग व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया गया। इनमें एक कतर से जुड़ा एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) टैंकर भी शामिल है, जिसमें हमले के बाद आग लग गई। राहत की बात यह रही कि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं और किसी बड़े पर्यावरणीय नुकसान की तत्काल सूचना नहीं मिली है।
अमेरिका ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि यह घटनाएं हाल ही में हुए युद्धविराम की भावना के खिलाफ हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ईरानी सैन्य बलों या उनसे जुड़े तत्वों ने वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया। हालांकि ईरान ने इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या जहाजों पर हमला अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर डालता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका प्रभाव भारत सहित दुनिया के अनेक देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद कतर में अप्रत्यक्ष वार्ता का दौर भी शुरू हुआ था, लेकिन समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद हुई ये घटनाएं वार्ता प्रक्रिया के लिए भी बड़ा झटका मानी जा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने भी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कई कंपनियां अब अपने जहाजों के मार्ग में बदलाव या अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर विचार कर रही हैं। समुद्री बीमा कंपनियों ने भी जोखिम बढ़ने के संकेत दिए हैं, जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों का सिलसिला जारी रहता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। इससे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
इस बीच अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले जारी रहे तो वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठा सकता है। दूसरी ओर, खाड़ी क्षेत्र के देशों ने भी संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है ताकि वैश्विक व्यापार प्रभावित न हो।
भूराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में अविश्वास का माहौल बना हुआ है। ऐसे में किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। दुनिया की निगाहें अब अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय देशों की अगली रणनीति पर टिकी हैं। यदि जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े संकट की ओर बढ़ सकता है।
फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इस तनाव का असर आने वाले दिनों में और स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
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