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पहले कश्मीरियों को बंदूकें दीं, अब आतंकवादी कहते हैं’, PoK नेता ने पाकिस्तान आर्मी पर लगाया आतंकवाद फैलाने का आरोप

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जारी जनआंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलन का मंगलवार को 24वां दिन पूरा हो गया। रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन में स्थानीय मीडिया और आंदोलन से जुड़े संगठनों के दावों के अनुसार 80 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा अपने अधिकारों की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और सेना लंबे समय से PoK के लोगों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है।

उनका कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्यों की अनदेखी की गई है, रोजगार के अवसर नहीं हैं, महंगाई लगातार बढ़ रही है और नागरिकों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाया जा रहा है। आंदोलनकारी यह भी आरोप लगा रहे हैं कि स्थानीय जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय विरोध करने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है। रावलकोट के ईदगाह मैदान में हजारों की संख्या में जुटे लोगों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान कई वक्ताओं ने कहा कि PoK के लोगों को राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

इस बीच प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान सेना पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। आंदोलनकारियों और कुछ स्थानीय संगठनों ने दावा किया कि सेना की नीतियों के कारण क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद को लेकर सरकार की नीतियां सवालों के घेरे में हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विश्लेषकों का मानना है कि PoK में लगातार जारी यह विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है। यदि आंदोलन इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील माना जाता है। फिलहाल रावलकोट सहित PoK के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। आंदोलनकारी अपने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताते हुए लगातार धरना और सभाएं आयोजित कर रहे हैं, जबकि प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

 

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