इंडोनेशिया में शनिवार को आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद लगातार आफ्टरशॉक से लोगों में दहशत फैल गई। करीब 17 घंटे के भीतर 6.5 और 6.0 तीव्रता के झटके भी महसूस किए गए। भूकंप से कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और कुछ ढह गईं। अब तक 47 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं।
भूकंप के बाद नागेकेओ इलाके में समुद्र का पानी अचानक पीछे हट गया। सुनामी की आशंका के चलते तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग घबराकर सुरक्षित और ऊंची जगहों की ओर भागने लगे। प्रशासन ने कुछ समय के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की, जिसे बाद में हटा लिया गया।
भूकंप के झटके फ्लोरेस द्वीप के कई हिस्सों में महसूस किए गए। सिक्का समेत प्रभावित इलाकों में अस्पतालों से मरीजों को एहतियातन बाहर निकाला गया और खुले स्थानों पर अस्थायी उपचार की व्यवस्था की गई। अधिकारियों ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस न जाने की अपील की है, क्योंकि आगे भी तेज आफ्टरशॉक आने की आशंका बनी हुई है।
सेंट पीटर मेजर सेमिनरी में प्रार्थना के दौरान सभा भवन की छत का एक हिस्सा गिर गया। हादसे के बाद छात्र और नन बाहर भागे। जान बचाने की कोशिश में एक पादरी दूसरी मंजिल से कूद गए, जिससे उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया।
इंडोनेशिया में लगातार भूकंप आने की बड़ी वजह उसका ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित होना है। यहां कई भूगर्भीय प्लेटें एक-दूसरे से मिलती हैं, जिसके कारण धरती के भीतर होने वाली हलचल से भूकंप और समुद्री भूकंप का खतरा बना रहता है। समुद्र के नीचे शक्तिशाली भूकंप आने पर सुनामी की आशंका भी बढ़ जाती है।
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