Breaking News

यूपी सरकार की ‘परिवर्तन योजना’ को मंजूरी, पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर मिलेगा टैक्स में बड़ा लाभ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और सड़कों पर चल रहे पुराने एवं अधिक प्रदूषण फैलाने वाले व्यावसायिक वाहनों की संख्या कम करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने ‘परिवर्तन योजना’ को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत पुराने बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3 और बीएस-4 श्रेणी के बसों एवं ट्रकों को अधिकृत रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (आरवीएसएफ) में स्क्रैप कराने वाले वाहन मालिकों को नए बीएस-6 अथवा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में विशेष छूट दी जाएगी।

राज्य सरकार का मानना है कि यह योजना प्रदेश, विशेष रूप से एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। पिछले कुछ वर्षों से एनसीआर में वायु गुणवत्ता लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। सर्दियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर कई बार गंभीर श्रेणी तक पहुंच जाता है, जिसमें पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों का उत्सर्जन भी एक प्रमुख कारण माना जाता है।

सरकार के अनुसार, सड़क परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए पुराने और अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ‘परिवर्तन योजना’ तैयार की गई है, ताकि वाहन मालिक स्वेच्छा से पुराने वाहनों को स्क्रैप कर पर्यावरण के अनुकूल नए वाहनों को अपनाने के लिए प्रेरित हों।

योजना के तहत केवल वही वाहन पात्र होंगे जिन्हें सरकार द्वारा अधिकृत रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (आरवीएसएफ) में विधिवत स्क्रैप कराया जाएगा। स्क्रैपिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहन मालिक को निर्धारित प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा, जिसके आधार पर नया वाहन खरीदते समय रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में निर्धारित रियायत का लाभ मिलेगा।

सरकार का कहना है कि इस योजना का सबसे अधिक लाभ व्यावसायिक वाहन मालिकों, परिवहन कंपनियों, बस ऑपरेटरों और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों को मिलेगा। पुराने वाहनों के स्थान पर नए बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर आने से ईंधन दक्षता बेहतर होगी, रखरखाव का खर्च कम हो सकता है और प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बीएस-6 (भारत स्टेज-6) मानक वाले वाहन पुराने बीएस-1 से बीएस-4 वाहनों की तुलना में काफी कम प्रदूषण फैलाते हैं। इनमें उन्नत इंजन तकनीक और बेहतर उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली का उपयोग किया जाता है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहन प्रत्यक्ष रूप से धुआं नहीं छोड़ते, जिससे शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया गया तो इससे प्रदेश में वाहन स्क्रैपिंग उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों के माध्यम से वाहनों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ धातु और अन्य उपयोगी सामग्री का पुनर्चक्रण भी संभव होगा।

योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य आधुनिक और सुरक्षित वाहनों को बढ़ावा देना भी है। पुराने वाहनों में सुरक्षा मानकों की कमी और तकनीकी खामियों के कारण दुर्घटनाओं का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है। नए वाहनों में उन्नत ब्रेकिंग सिस्टम, बेहतर उत्सर्जन नियंत्रण, आधुनिक सुरक्षा फीचर और अधिक ईंधन दक्षता उपलब्ध होती है।

सरकार का मानना है कि टैक्स और पंजीकरण शुल्क में दी जाने वाली छूट वाहन मालिकों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन का काम करेगी। इससे लोग पुराने वाहनों को लंबे समय तक चलाने के बजाय समय पर बदलने के लिए प्रेरित होंगे। इससे राज्य में स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कई राज्यों में पुराने वाहनों को हटाने के लिए प्रोत्साहन आधारित योजनाएं लागू की जा रही हैं। उत्तर प्रदेश की ‘परिवर्तन योजना’ भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यदि योजना का लाभ बड़ी संख्या में वाहन मालिक उठाते हैं तो आने वाले वर्षों में एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है।

राज्य सरकार द्वारा जल्द ही योजना से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश, पात्रता की शर्तें, छूट की सीमा, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी जारी किए जाने की संभावना है। परिवहन विभाग अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों के माध्यम से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की तैयारी में जुटा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नई तकनीक वाले वाहन अपनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना, वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ाना और यातायात प्रबंधन में सुधार जैसे कदम भी समान रूप से आवश्यक होंगे।

फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार की ‘परिवर्तन योजना’ को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि पुराने प्रदूषणकारी वाहनों के स्थान पर आधुनिक बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से न केवल वायु प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि प्रदेश में हरित परिवहन को भी नई गति मिलेगी।

About Rizvi Rizvi

Check Also

Uttar Pradesh moves towards Energy Self-Reliance, achieves major milestone

Lucknow: Under the capable and visionary leadership of Minister for Urban Development and Energy, Shri …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *