लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गन्ने का मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत आयोजित की गई। इसमें एक हजार से अधिक किसान शामिल हुए। किसानों ने बढ़ती खेती की लागत, गन्ने के बकाया भुगतान और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने जैसी समस्याओं को उठाया। महापंचायत में बड़ी संख्या में महिला किसान भी पहुंचीं।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार पर निशाना साधते हुए धान, गन्ने और वोटों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल रहा है, जबकि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने किसानों की समस्याओं का समाधान करने और गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग की।
खेती की लागत बढ़ी, किसानों को उचित मूल्य नहीं
महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन युवा विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव टिकैत ने कहा कि खेती में खाद, बीज, सिंचाई और अन्य संसाधनों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य बताया गया था, लेकिन किसानों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
किसान नेताओं ने सरकार से गन्ने का मूल्य बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
गन्ने के भुगतान और जमीन अधिग्रहण का मुद्दा भी उठा
राकेश टिकैत ने महापंचायत के दौरान गन्ने के बकाया भुगतान और फसलों के कम दाम का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिलने से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने चीनी के बढ़ते बाजार भाव के बीच गन्ना किसानों को भी उचित लाभ देने की जरूरत बताई।
इसके साथ ही उन्होंने हाईवे निर्माण, औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए। किसान नेताओं ने मांग की कि जमीन अधिग्रहण में उचित मुआवजा दिया जाए और किसानों के हितों की अनदेखी न हो।
अनुमति नहीं मिलने पर गेट के बाहर धरने पर बैठे किसान
महापंचायत के आयोजन को लेकर गुरुवार को भी असमंजस की स्थिति बनी रही। किसान बड़ी संख्या में लखनऊ पहुंच चुके थे, लेकिन गन्ना संस्थान का गेट बंद होने और अनुमति नहीं मिलने की सूचना से उनमें नाराजगी बढ़ गई। इसके बाद राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसान संस्थान के गेट के बाहर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी की।
किसानों के विरोध के बीच प्रशासन ने महापंचायत की अनुमति दे दी। शुक्रवार सुबह गेट खुलने के बाद किसान परिसर में पहुंचे और पंचायत की कार्यवाही शुरू हुई।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि गन्ने का उचित मूल्य, बकाया भुगतान और खेती से जुड़ी समस्याएं उनकी प्रमुख मांगें हैं। राकेश टिकैत ने मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन तेज करने और उत्तर प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी।
महापंचायत के जरिए किसानों ने सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने की कोशिश की। अब किसानों की निगाहें गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी और बकाया भुगतान को लेकर सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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