शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को उन स्नातकोत्तर बाल रोग विशेषज्ञों की जानकारी उपलब्ध करवाने के आदेश दिए हैं जिन्होंने कभी भी जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं नहीं दी हैं। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने सिविल अस्पताल भरमौर में सेवारत डा. वसीम अकरम द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के बाद सरकार को आदेश दिए कि वह चंबा, कांगड़ा, ऊना और मंडी जिलों में तैनात उन बाल रोग स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त चिकित्सा अधिकारियों का विवरण दें, जिन्होंने जनजातीय क्षेत्र में सेवा नहीं की है। याचिकाकर्ता की मांग है कि उसने जनजातीय क्षेत्र में सामान्य कार्यकाल पूरा कर लिया है इसलिए उसे उसकी इच्छानुसार बताए स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर।
सरकार के तर्क पर कोर्ट की टिप्पणी
सरकार का कहना था कि बाल रोग विशेषज्ञों की कमी के कारण फिलहाल प्रार्थी का तबादला करना संभव नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि क्या किसी कर्मी को स्टाफ की कमी के कारण अनिश्चितकाल तक किसी एक स्थान विशेषकर जनजातीय क्षेत्र में रहने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
विकल्प ढूंढना संबंधित अथारिटी की जिम्मेदारी
इससे पहले भी प्रदेश हाई कोर्ट ने ट्राइबल व दुर्गम क्षेत्रों में अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा करने वाले सरकारी कर्मचारियों को ट्रांसफर करने के मामले में विकल्प जैसी शर्त लगाकर लंबे समय तक वहीं रहने को बाध्य करने को कानूनी तौर पर गलत ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विकल्प को तलाशने की जिम्मेदारी संबंधित अथारिटी की है न की ट्राइबल में सेवाएं देने वाले कर्मी की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने टीजीटी नान मेडिकल राजेश कुमार, सुनील कुमार व राजेंद्र कुमार द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई के पश्चात यह फैसला दिया था।
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