राजधानी लखनऊ में तैनात सिपाही सुनील शुक्ला द्वारा विभागीय भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम ने पुलिस महकमे में भूचाल ला दिया है। सिपाही के विस्फोटक इंटरव्यू के बाद, जिसमें ‘ड्यूटी लगाने के नाम पर वसूली’ के गंभीर आरोप लगाए गए थे, पुलिस प्रशासन ने आनन-फानन में बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने गणना कार्यालय (गणना ऑफिस) में तैनात दो मुख्य आरक्षी समेत 12 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।
सिपाही सुनील शुक्ला ने सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार तीन वीडियो जारी कर विभाग के भीतर चल रहे ‘अवैध वसूली तंत्र’ की कलई खोल दी थी। उन्होंने दावा किया कि गार्ड ड्यूटी लगाने के नाम पर हर सिपाही से 2000 रुपये तक की मांग की जाती है। यह रकम एक व्यवस्थित ‘चैन सिस्टम’ के जरिए ऊपर बैठे सफेदपोशों तक पहुँचती है। इस इंटरव्यू के वायरल होते ही विभाग की छवि पर सवाल उठने लगे, जिसके बाद प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा।
सुनील शुक्ला के आरोपों का सबसे बड़ा असर ड्यूटी आवंटन की प्रक्रिया पर पड़ा है। अब तक गणना कार्यालय के कर्मचारी अपनी मर्जी और ‘सेटिंग’ के आधार पर ड्यूटी तय करते थे, लेकिन अब इस प्रणाली को पूरी तरह बदलने की तैयारी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अब कंप्यूटरीकृत सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली लागू की जाएगी। इस डिजिटल बदलाव से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि ड्यूटी लगाने में मानवीय हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी।
लखनऊ पुलिस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (ट्विटर) हैंडल से स्पष्ट किया है कि जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए ही इन 12 कर्मियों को हटाया गया है। एक उच्च स्तरीय कमेटी मामले की तह तक जाने में जुटी है। इस बीच, सुनील शुक्ला ने एक और वीडियो जारी कर सनसनी फैला दी है कि उनके परिवार को परेशान किया जा रहा है। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने प्रताड़ना के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सिपाही के इस साहस ने पुलिस विभाग के भीतर दबे उस सच को बाहर ला दिया है जिसे अब तक ‘अनुशासन’ के नाम पर दबाया जाता था। अब देखना यह है कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में किन बड़े नामों पर गाज गिरती है और क्या यह डिजिटल सिस्टम भ्रष्टाचार के इस पुराने ‘नेटवर्क’ को पूरी तरह ध्वस्त कर पाएगा।
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