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सिद्धार्थनगर में महिला से बर्बरता का आरोप, निर्वस्त्र कर खंभे से बांधकर पीटने का दावा; प्रधान समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप

लखनऊ। सिद्धार्थनगर जिले के खेसरहा थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ कथित मारपीट, यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता ने ग्राम प्रधान और उसके सहयोगियों पर घर में घुसकर अभद्रता करने, कपड़े फाड़ने, खंभे से बांधकर करीब तीन घंटे तक बेरहमी से पीटने का आरोप लगाया है। मामले में स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने का दावा करते हुए महिला शुक्रवार को लखनऊ पहुंची और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई।

घर में घुसकर महिला से मारपीट का आरोप

पीड़िता की ओर से महिला आयोग और पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र के मुताबिक, घटना 27 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब सात बजे की है। महिला का आरोप है कि वह अपने बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी कर रही थी, तभी ग्राम प्रधान अहमद हुसैन सहित 20 से 25 लोग जबरन उसके घर में घुस आए।

आरोप है कि हमलावरों ने उसके कपड़े फाड़ दिए और बाल पकड़कर घसीटते हुए खंभे से बांध दिया। इसके बाद करीब तीन घंटे तक लाठी-डंडों और लात-घूंसों से उसकी पिटाई की गई। बीच-बचाव करने पहुंचीं महिलाओं को भी धमकाने का आरोप लगाया गया है।

यौन उत्पीड़न और जबरन गर्भपात कराने का आरोप

महिला ने अपनी शिकायत में ग्राम प्रधान पर पहले भी प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। पीड़िता का दावा है कि पूर्व में उसे नशीला पदार्थ देकर यौन उत्पीड़न किया गया था, जिसके चलते वह गर्भवती हो गई। आरोप है कि बाद में उसे जबरन दवा खिलाकर गर्भपात करा दिया गया।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि हालिया घटना के दौरान उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया गया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई।

पुलिस पर शिकायत फाड़ने का लगाया आरोप

पीड़िता ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि थाने में दी गई मूल शिकायत को थानाध्यक्ष ने फाड़कर फेंक दिया और उसकी सहमति के बिना शिकायत में मनमाना विवरण दर्ज किया गया। महिला का यह भी कहना है कि उसके खिलाफ उल्टा कार्रवाई की गई।

पीड़िता के मुताबिक, मेडिकल परीक्षण नहीं कराए जाने के कारण उसने अपने शरीर पर आई चोटों के फोटो और वीडियो खुद सुरक्षित रखे हैं।

एसपी कार्यालय में भी धमकी देने का दावा

शिकायत के अनुसार, 2 नवंबर को महिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची थी। वहां भी आरोपियों की ओर से भीड़ जुटाकर मीडिया के सामने जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है।

अब पीड़िता ने महिला आयोग और पुलिस के उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने तथा खुद और अपने परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

नोट: मामले में लगाए गए सभी आरोप पीड़िता की शिकायत पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं।

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