लखनऊ, 5 नवंबर 2026। उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थियों ने लखनऊ में शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव कर प्रदर्शन किया। करीब एक घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन में अभ्यर्थियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से जल्द नियुक्ति देने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने शंख और घंटियां बजाकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की।
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने आरक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने ‘आरक्षण की चोरी बंद करो’ और पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को न्याय देने की मांग करते हुए नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के सामने अपनी बात रखने के लिए जमीन पर लेट गए और हाथ जोड़कर नियुक्ति की गुहार लगाने लगे।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई नोकझोंक
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर बसों में बैठाया। इस कार्रवाई के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने पुलिस पर मारपीट, गाली-गलौज और कपड़े फाड़ने के आरोप लगाए। एक प्रदर्शनकारी ने रोते हुए दावा किया कि बस में बैठाने के बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें लातों से पीटा, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बेटी की याद में फूट-फूटकर रोया अभ्यर्थी
प्रदर्शन के दौरान आजमगढ़ से आए घनश्याम भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि वह पिछले ढाई महीने से घर नहीं गए हैं। उनकी तीन साल की बेटी बीमार है और रोज वीडियो कॉल करके पूछती है कि पापा घर कब आएंगे। घनश्याम के मुताबिक, उनकी बेटी को हाल ही में 15 दिनों तक मेडिकल कॉलेज में भर्ती रखना पड़ा था। ऑपरेशन के बाद उसकी नियमित एक्सरसाइज होनी थी, लेकिन नियुक्ति की मांग को लेकर वह परिवार से दूर लखनऊ में प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।
बहन की शादी छोड़कर पहुंचे प्रदर्शन में
मैनपुरी से आए आशीष कुमार ने बताया कि उनके घर में बहन की शादी है। परिवार और रिश्तेदार शादी की तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन वह नौकरी की मांग को लेकर लखनऊ में आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि आठ साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की परेशानियों को सरकार गंभीरता से नहीं समझ रही है।
11 दिन से भूख हड़ताल कर रहे अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ी
प्रदर्शन में शामिल एक अभ्यर्थी पिछले 11 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठा है। गुरुवार को आंदोलन के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिससे मौके पर चिंता का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से संघर्ष करने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
पांच प्रतिशत छूट और संशोधित चयन सूची की मांग
अभ्यर्थियों के मुताबिक, वर्ष 2018 में 68,500 सहायक शिक्षक पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। उनका आरोप है कि दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को मिलने वाली पांच प्रतिशत की छूट का सही तरीके से लाभ नहीं दिया गया। इसके कारण कई अभ्यर्थियों का परिणाम सामान्य कटऑफ के आधार पर घोषित कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि 150 पूर्णांक वाली परीक्षा में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत को उत्तीर्ण अंक मानते हुए परिणाम में संशोधन किया जाए और नई चयन सूची जारी की जाए।
आठ साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी
सीतापुर से पहुंचे आशुतोष वर्मा ने कहा कि अभ्यर्थी पिछले आठ वर्षों से नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया। अभ्यर्थियों का दावा है कि राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से भी इस मामले में नियमों के पालन को लेकर निर्देश दिए गए हैं।
अभ्यर्थियों ने सरकार से आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को दूर करने, परिणाम संशोधित करने और जल्द नियुक्ति देने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से चल रहे इंतजार ने उनके परिवारों की आर्थिक और मानसिक परेशानियां बढ़ा दी हैं। अब सरकार को उनकी मांगों पर जल्द फैसला लेना चाहिए।
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