Breaking News

डार्क वेब के जरिए युवाओं को देता था गुप्त निर्देश, महिलाओं को फंसाने के तरीके सिखाने का आरोप

लखनऊ। डार्क वेब के जरिए कथित तौर पर अपना नेटवर्क संचालित करने और साथियों को गुप्त टास्क देने के मामले में रमीजुद्दीन की गतिविधियों को लेकर जांच तेज हो गई है। आरोप है कि वह ऑनलाइन माध्यम से अपने साथियों को निर्देश देता था और उन्हें महिलाओं को अपने जाल में फंसाने के तरीके भी बताता था। इस मामले में सामने आ रहे डिजिटल साक्ष्यों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रमीजुद्दीन किस तरह डार्क वेब का इस्तेमाल करता था और उसके संपर्क में कितने लोग थे। आशंका है कि वह अपने साथियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपता था, ताकि गतिविधियों को गुप्त रखा जा सके। महिलाओं को निशाना बनाने के लिए अपनाई जाने वाली कथित रणनीतियों की भी जांच की जा रही है।

डिजिटल नेटवर्क की भूमिका की हो रही पड़ताल

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस कथित नेटवर्क की पूरी संरचना का पता लगाना है। इसके लिए ऑनलाइन बातचीत, डिजिटल डिवाइस और इंटरनेट गतिविधियों से जुड़े साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि साथियों को निर्देश देने के लिए किन डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था और उनके बीच संपर्क बनाए रखने का तरीका क्या था।

डार्क वेब इंटरनेट का ऐसा हिस्सा है, जहां सामान्य सर्च इंजन के जरिए सीधे पहुंचना संभव नहीं होता। इसका इस्तेमाल गोपनीयता बनाए रखने के लिए भी किया जाता है, हालांकि इसका दुरुपयोग आपराधिक गतिविधियों में भी हो सकता है। ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच के जरिए नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने में मदद मिलती है।

KGMU के बाद PGI तक पहुंच सकती है जांच

मामले में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) का नाम सामने आने के बाद अब संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) तक जांच का दायरा बढ़ने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर सकती हैं कि संबंधित लोगों के संस्थानों से क्या संपर्क थे और कहीं अन्य लोगों की भूमिका भी तो नहीं है।

संस्थानों से जुड़े रिकॉर्ड, संपर्कों और उपलब्ध डिजिटल जानकारियों का मिलान जांच को आगे बढ़ाने में अहम हो सकता है। हालांकि किसी भी संस्थान या व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही निकाला जा सकेगा।

साथियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू रमीजुद्दीन के कथित साथियों की भूमिका है। एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर सकती हैं कि उसे कौन लोग जानकारी उपलब्ध कराते थे, किन लोगों को टास्क दिए जाते थे और निर्देशों के अनुसार कौन-कौन काम करता था। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि नेटवर्क में शामिल लोगों के बीच किसी तरह का संगठित संपर्क था या वे अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे थे।

महिलाओं को निशाना बनाने के आरोप गंभीर

महिलाओं को अपने जाल में फंसाने के तरीके बताए जाने का आरोप इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है। जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि कथित तौर पर महिलाओं को किस तरह निशाना बनाया जाता था और क्या इस संबंध में कोई ठोस डिजिटल या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। पीड़ितों की पहचान और उनकी निजता सुरक्षित रखना भी जांच की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

फिलहाल जांच एजेंसियों का ध्यान पूरे नेटवर्क की पहचान करने, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और कथित गतिविधियों से जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट करने पर है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ने के साथ इस मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। अधिकारियों की ओर से साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है।

About NW-Editor

Check Also

KGMU में डॉक्टरों पर गिरेगी कार्रवाई की गाज, सात विभागों की भूमिका की होगी जांच

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण और लव जिहाद से जुड़े मामले …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *