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अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से ट्रम्प की सत्ता पर संकट, कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत बचाने की चुनौती

वॉशिंगटन। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए आज मतदान हो रहा है। इन चुनावों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दो साल के कार्यकाल का अहम राजनीतिक परीक्षण माना जा रहा है। चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के सामने संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत बरकरार रखने की चुनौती है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी सत्ता संतुलन बदलने के इरादे से मैदान में उतरी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद होने वाले मिडटर्म चुनाव में संसद की सीटों के साथ कई राज्यों में गवर्नर पदों के लिए भी मतदान कराया जाता है। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव होना है।

फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी को अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल है। यदि पार्टी किसी एक सदन में भी बहुमत गंवा देती है, तो राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए अपने राजनीतिक एजेंडे को लागू करना और नए कानून पारित कराना मुश्किल हो सकता है।

सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत का मुकाबला

अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट में कुल 100 सीटें हैं। बहुमत के लिए 51 सीटों की आवश्यकता होती है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 और डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 45 सीटें हैं। दो निर्दलीय सदस्य भी डेमोक्रेट्स के साथ काम करते हैं।

इस चुनाव में सीनेट की 35 सीटों पर मुकाबला है। डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम चार सीटों का शुद्ध फायदा उठाना होगा। वहीं, प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सीटें हैं और बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत है। सभी सीटों पर मतदान होने के कारण यहां भी दोनों दलों के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।

चुनाव में चार बड़े मुद्दे बने ट्रम्प की परेशानी

1. ईरान युद्ध और बढ़ती महंगाई

ईरान युद्ध के बाद अमेरिका में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा चुनाव में छाया हुआ है। पेट्रोल और डीजल महंगा होने से आम परिवारों का बजट प्रभावित हुआ है। ऊर्जा कीमतों और रूस से डीजल खरीदने के फैसले को लेकर भी ट्रम्प प्रशासन की आलोचना हो रही है।

2. अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई

ट्रम्प प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया है। बड़ी संख्या में लोगों को देश से बाहर भेजा गया और मेक्सिको सीमा पर घुसपैठ में कमी आने का दावा किया गया है। हालांकि, छापेमारी और परिवारों के अलग होने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

3. टैरिफ नीति और रोजगार

ट्रम्प ने आयात पर टैरिफ लगाकर अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों को बढ़ावा देने का वादा किया था। लेकिन विपक्ष का कहना है कि इस नीति से इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, कपड़े और निर्माण सामग्री महंगी हुई है। दूसरे देशों की जवाबी कार्रवाई से अमेरिकी किसानों के कारोबार पर भी असर पड़ा है।

4. गर्भपात का अधिकार और स्वास्थ्य बीमा

गर्भपात के कानूनी अधिकार और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत भी चुनाव के प्रमुख मुद्दे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी पूरे देश में महिलाओं के गर्भपात अधिकारों की सुरक्षा की मांग कर रही है, जबकि रिपब्लिकन राज्यों को इस संबंध में फैसला लेने का अधिकार देने के पक्ष में हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य बीमा पर सरकारी सहायता में कटौती की आशंका भी मतदाताओं को प्रभावित कर रही है।

पांच राज्यों की सीनेट सीटों पर दिलचस्प मुकाबला

टेक्सास, ओहायो, नॉर्थ कैरोलाइना, मिशिगन और मेन में सीनेट की सीटों पर मुकाबला विशेष रूप से चर्चा में है। इन राज्यों में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर बताई जा रही है। चुनावी सर्वेक्षणों में कई जगह डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को बढ़त मिलने के दावे किए गए हैं।

इन सीटों के नतीजे सीनेट में बहुमत का समीकरण बदल सकते हैं। इसलिए दोनों पार्टियों ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

भारतीय मूल के उम्मीदवारों पर भी टिकी निगाहें

अमेरिकी चुनाव में भारतीय मूल के नेताओं की भागीदारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, सुहास सुब्रमण्यम, अमीश शाह और पिया डांडिया जैसे उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।

इनमें कई उम्मीदवार डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं। कुछ सीटों पर भारतीय मूल के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला भी देखने को मिल रहा है।

इसके अलावा रिपब्लिकन पार्टी के विवेक रामास्वामी ओहायो में गवर्नर पद के उम्मीदवार हैं। उनकी जीत से भारतीय मूल के नेताओं को अमेरिकी राजनीति में एक और बड़ी उपलब्धि मिल सकती है।

ट्रम्प के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?

मिडटर्म चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि राष्ट्रपति ट्रम्प अपने शेष कार्यकाल में कितनी राजनीतिक ताकत के साथ काम कर पाएंगे। यदि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में बहुमत बचाने में सफल रहती है तो सरकार के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान होगा।

वहीं, डेमोक्रेट्स को किसी एक सदन में भी बहुमत मिलने पर राष्ट्रपति के फैसलों और विधायी योजनाओं पर निगरानी तथा विरोध की ताकत मिल जाएगी। ऐसे में यह चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि ट्रम्प प्रशासन की राजनीतिक पकड़ का भी बड़ा इम्तिहान माना जा रहा है।

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