अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान 10 से अधिक अमेरिकी सैन्य मालवाहक विमान दक्षिणी इजराइल के एयरबेस पर पहुंचे हैं। इसके साथ ही सऊदी अरब, कतर, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी सैन्य विमानों की आवाजाही बढ़ी है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर चर्चा हुई। बैठक में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन भी मौजूद रहे।
ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकाने बन सकते हैं निशाना
पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य हलचल के बीच अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ नई कार्रवाई की संभावनाएं जताई जा रही हैं। संभावित योजना के तहत ईरान के ऊर्जा केंद्रों, परमाणु प्रतिष्ठानों, मिसाइल ठिकानों और ड्रोन भंडार को निशाना बनाया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि दोनों देश सीमित समय में तेज सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लेना है और यह भी संभव है कि वह फिलहाल सैन्य कार्रवाई से बचने का निर्णय करें।
इजराइल समेत कई देशों में बढ़ाई जा रही अमेरिकी सैन्य तैनाती
अमेरिकी सैन्य मालवाहक विमानों की आवाजाही पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर विमान टेक्सास के बिग्स आर्मी एयरफील्ड से रवाना हुए और इजराइल के नेवातिम तथा ओवदा एयरबेस पर पहुंचे।
इसके अलावा अमेरिका ने सऊदी अरब, कतर, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अपने सैन्य ठिकानों पर भी विमान पहुंचाए हैं। इन विमानों के जरिए किस तरह के सैन्य उपकरण और सामग्री भेजी गई है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है। इसी कड़ी में टेक्सास से पैट्रियट मिसाइल सिस्टम की एक बैटरी क्षेत्र में भेजी जा रही है। यह प्रणाली दुश्मन की ओर से दागी जाने वाली मिसाइलों को हवा में ही रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
चुनावी दखल को लेकर ईरान पर गंभीर आरोप
इस बीच ईरान पर इजराइल और अमेरिका के चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश करने के आरोप भी सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने इजराइल के चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए गतिविधियां कीं और अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में भी हस्तक्षेप की तैयारी कर रहा था।
रिपोर्टों के मुताबिक, इसके लिए एजेंटों की भर्ती और अमेरिकी चुनावी व्यवस्था को निशाना बनाने वाले साइबर समूह तैयार करने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों को लेकर स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि नहीं हुई है।
इजराइल में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को जांच के निर्देश दिए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के रास्ते भी खुले
सैन्य तनाव के बीच दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं। ईरान ने गुरुवार को जानकारी दी कि उसे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का पत्र मिला है, हालांकि अभी तक उसने इसका जवाब नहीं दिया है।
बताया जा रहा है कि पत्र का उद्देश्य दोनों देशों के बीच शांति वार्ता दोबारा शुरू करने का रास्ता तलाशना था। दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के सामने अपनी सात शर्तें पूरी करने की मांग दोहराई है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने हालांकि स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति वेंस का संपर्क शांति वार्ता के लिए नहीं, बल्कि ईरान को मेडिकल सामान और आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने के मामले में हुआ था। ट्रम्प के अनुसार, ईरान ने बीमार लोगों के लिए जरूरी चिकित्सा सामग्री की मदद मांगी थी, जिसकी अनुमति उन्होंने दे दी।
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तीन तेल टैंकरों में धमाके
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, पिछले 24 घंटों में तीन टैंकर समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गए। इन घटनाओं के बाद जहाजों में धमाके हुए और आग लग गई।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि तीनों टैंकर होर्मुज के दक्षिण में निर्धारित मार्ग से हटकर ऐसे रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे थे, जहां जाने की अनुमति नहीं थी।
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, टैंकरों ने अपने रडार और नेविगेशन सिस्टम बंद कर रखे थे तथा नौसेना की चेतावनियों को भी नजरअंदाज किया था। हालांकि, इन घटनाओं के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से दुनिया की चिंता बढ़ी
अमेरिकी सैन्य विमानों की बढ़ती आवाजाही, इजराइल की तैयारियों, ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई और होर्मुज के आसपास टैंकरों में हुए धमाकों ने पश्चिम एशिया की स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। यदि अमेरिका और इजराइल सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनते हैं तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।
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