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KGMU में डॉक्टरों पर गिरेगी कार्रवाई की गाज, सात विभागों की भूमिका की होगी जांच

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण और लव जिहाद से जुड़े मामले ने नया मोड़ ले लिया है। विशेष कार्यबल (STF) की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित डॉक्टरों और अधिकारियों की भूमिका की संस्थागत स्तर पर जांच कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में 6 नवंबर को आपात कार्यपरिषद की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में जांच कमेटी गठित करने और आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर विचार किया जाएगा।

सात विभागों के डॉक्टरों की भूमिका होगी जांच के दायरे में

STF की रिपोर्ट में KGMU के पैथोलॉजी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमैया कय्यूम सहित कई लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में कथित नेटवर्क से जुड़े संपर्कों, गतिविधियों और संस्थागत संबंधों की जानकारी दी गई है।

प्रस्तावित जांच में पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रेडियोलॉजी, मेडिसिन और इमरजेंसी मेडिसिन समेत कुल सात विभागों की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों से भी जवाब मांगा जा सकता है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि संबंधित गतिविधियों में किन लोगों की भूमिका रही और प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारियों का कितना निर्वहन किया।

महिला डॉक्टरों की शिकायतों पर भी होगी पड़ताल

इस मामले में महिला डॉक्टरों की ओर से पहले की गई शिकायतों को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। आरोप है कि कुछ महिला चिकित्सकों ने उत्पीड़न और अन्य परेशानियों को लेकर संस्थान प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

STF की रिपोर्ट में इन शिकायतों और उनसे जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। अब प्रस्तावित कमेटी यह जांच कर सकती है कि शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन ने क्या कदम उठाए और यदि कार्रवाई में देरी हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

निजी मेडिकल संस्थानों में निवेश और संपर्कों का उल्लेख

जांच रिपोर्ट में कुछ डॉक्टरों के लखनऊ स्थित एक निजी मेडिकल संस्थान में आर्थिक निवेश का भी जिक्र किया गया है। इसके अलावा एक अन्य निजी विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से जुड़े चिकित्सकों के कथित संपर्कों और गतिविधियों का उल्लेख भी किया गया है।

इन आर्थिक लेनदेन और संस्थागत संबंधों की वास्तविकता जानने के लिए जांच में संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है।

SGPGI के प्रोफेसर का नाम आने से बढ़ा जांच का दायरा

STF की रिपोर्ट में KGMU की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. सुमैया कय्यूम के पति और SGPGI के हेमेटोलॉजी विभाग के प्रोफेसर खलीकुर्रहमान का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा रेडियोलॉजी विभाग में तैनात एक अन्य डॉक्टर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ डॉक्टर धर्म विशेष के मरीजों को जांच और उपचार में प्राथमिकता देते थे। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र संस्थागत जांच होना अभी बाकी है।

KGMU के हिंदू रेजिडेंट डॉक्टरों के बयान STF पहले ही दर्ज कर चुकी है। अब SGPGI के हिंदू रेजिडेंट डॉक्टरों के बयान दर्ज करने की भी तैयारी है, ताकि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा सके।

दोषी मिलने पर बर्खास्तगी तक हो सकती है कार्रवाई

KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, 6 नवंबर को प्रस्तावित आपात कार्यपरिषद की बैठक में STF की रिपोर्ट के निष्कर्षों पर चर्चा की जाएगी। बैठक में विश्वविद्यालय स्तर पर जांच कमेटी गठित करने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि कार्यपरिषद के पास दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और डॉक्टरों के खिलाफ बर्खास्तगी तक की कार्रवाई करने का अधिकार है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र संस्थागत जांच बाकी है। जांच पूरी होने और आरोप प्रमाणित होने के बाद ही संबंधित डॉक्टरों की जिम्मेदारी और उनके खिलाफ कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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