न्यूज़ वाणी, अतर्रा (बांदा)। बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और आयुर्वेदिक पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अतर्रा स्थित विश्वकर्मा केयर सेंटर में स्वर्ण प्राशन स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में लगभग 300 बच्चों को स्वर्ण प्राशन की बूंदें पिलाई गईं। इस दौरान चिकित्सकों ने अभिभावकों को बच्चों के बेहतर शारीरिक विकास, संतुलित खानपान, स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के महत्व की जानकारी दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ आयुर्वेदिक कॉलेज, अतर्रा की प्रधानाचार्य डॉ. सुमन यादव ने भगवान धन्वंतरि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए पौष्टिक भोजन, पर्याप्त नींद, साफ-सफाई और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण बेहद जरूरी हैं। अभिभावकों को बच्चों की दिनचर्या और खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
शिविर के आयोजक एवं शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन विश्वकर्मा ने स्वस्थ समाज के निर्माण का संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य जागरूकता शिविरों के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए जागरूक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
इस अवसर पर अतर्रा पीजी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. प्रमोद विश्वकर्मा ने कहा कि बच्चों का बेहतर भविष्य उनके अच्छे स्वास्थ्य और उचित पोषण पर निर्भर करता है। ऐसे शिविरों में अधिक से अधिक लोगों को भाग लेकर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
डॉ. अनिल शर्मा ने स्वर्ण प्राशन को आयुर्वेद की पारंपरिक पद्धति बताते हुए बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों के समुचित विकास के लिए संतुलित आहार, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और अनुशासित दिनचर्या महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों को स्वास्थ्य संबंधी निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह के आधार पर लेने की बात कही।
शिविर में बड़ी संख्या में बच्चों के साथ उनके अभिभावकों ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूकता फैलाना और स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश देना रहा।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रगति शर्मा ने सभी अतिथियों, चिकित्सकों, सहयोगियों और अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए शिविर का समापन किया। कार्यक्रम का संचालन धीरेंद्र विश्वकर्मा ने किया।
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