Breaking News

“ईरान का ‘गद्दार’ गिरफ्तार: मोसाद को ईरान ने दी फांसी: तेहरान की कड़ी कार्रवाई से हड़कंप”

ईरान पर लगातार हुए हमले में न सिर्फ ईरान के बड़े-बड़े नेताओं की मौत हो गई है बल्कि उसकी संपत्ति का भी खासा नुकसान हुआ है. ऐसे में सवाल यही उठता है कि आखिर इजरायल के पास ईरान के ठिकानों की जानकारी कैसे थी, जो उसके हमले इतने ज्यादा सटीक थे. चाहे वो सर्वोच्च लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई हों या फिर सुरक्षा प्रमुख लारिजानी और कई वरिष्ठ अधिकारी, आखिर इजरायल तक ये जानकारियां पहुंचाता कौन था? यही सवाल ईरान को भी बेचैन कर रहा होगा, तभी तो उसने अपने घर को खंगालना शुरू कर दिया और करीब 600 लोगों की गिरफ्तारी की है. इनमें से एक को फांसी की सजा भी सुनाई गई है.
इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में एक व्यक्ति को फांसी दे दी है. न्यायिक अधिकारियों के मुताबिक अगिल केशावर्ज नाम के इस शख्स को शनिवार सुबह सजा दी गई, जब सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ जासूसी के आरोपों को बरकरार रखा. इजरायल की अर्ध-सरकारी एजेंसी मिज़ान न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 27 साल के केशवर्ज एक आर्किटेक्चर छात्र था. उसे इस साल की शुरुआत में उत्तर-पश्चिमी शहर उर्मिया में गिरफ्तार किया गया था, जब वह सेना के मुख्यालय की तस्वीरें लेते हुए पकड़ा गया.

मोसाद के लिए जासूस कर रहा था गद्दार

रिपोर्ट के मुताबिक उस पर आरोप था कि उसने मोसाद और इजरायली सैन्य अधिकारियों के लिए 200 से ज्यादा मिशन पूरे किए. इनमें संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें लेना, कुछ जगहों पर सर्वे करना और खास इलाकों में ट्रैफिक की निगरानी करना शामिल था. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वह एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में रहता था और हर मिशन के बाद उसे क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान किया जाता था. यह फांसी ऐसे समय दी गई है जब ईरान जासूसी के मामलों में सख्ती बढ़ा रहा है. अमेरिका-ईरान की हालिया कार्रवाई के पीछे भी मोसाद एजेंट्स का बड़ा हाथ बताया जा रहा है.
जून में हुए 12 दिन के युद्ध के बाद से अब तक कम से कम 10 लोगों को जासूसी के आरोप में मौत की सजा दी जा चुकी है. अक्टूबर में ईरान ने कानून और कड़े कर दिए, जिसके तहत इजरायल और अमेरिका के लिए जासूसी करने पर सीधे मौत की सजा और संपत्ति जब्त करने का प्रावधान किया गया है. हालांकि नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स संगठन ने ऐसे मामलों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि कई बार आरोपियों से दबाव में आकर कबूलनामे कराए जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हालिया संघर्षों के बाद ईरान आंतरिक सुरक्षा को लेकर ज्यादा सख्त रुख अपना रहा है, जिससे ऐसे मामलों में सजा की संख्या बढ़ रही है.

About NW-Editor

Check Also

होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को मिली मंजूरी, फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाज पर हमले में एक भारतीय की मौत

अमेरिका-इजराइल और ईरान में 13 दिन से जारी जंग के बीच भी भारतीय जहाज होर्मुज …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *