लखनऊ। करवा चौथ जैसे खास पर्व पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राजकीय नर्सों ने अपनी मांगों को लेकर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में मेहंदी रचाकर और पारंपरिक परिधान में सजी महिला नर्सें बलरामपुर अस्पताल परिसर में एकत्र हुईं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने दो घंटे का कार्य बहिष्कार करते हुए अपनी पांच सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।
नर्सों ने हाथों में चलनी लेकर उसके माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने का प्रयास किया। उनका कहना था कि करवा चौथ पर महिलाएं चलनी से चांद देखकर अपना व्रत खोलती हैं, लेकिन उन्हें इस दिन भी अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी नर्सों ने इसे सरकार के वादों और महिला सम्मान के दावों के विपरीत बताया।
एक साल बाद भी मांगें पूरी नहीं होने का आरोप
राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश के महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि बलरामपुर अस्पताल सहित प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में नर्सें अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रही हैं। उनका आरोप है कि करीब एक साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने नर्सों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक संबंधित शासनादेश जारी नहीं किए गए हैं।
संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक, सहमति बनने के बावजूद निर्णय लागू नहीं होने से नर्सों में नाराजगी है। इसी के विरोध में पिछले 21 दिनों से प्रतिदिन दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो नर्सें अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाने को मजबूर हो सकती हैं।
करवा चौथ के निर्जला व्रत में भी प्रदर्शन करने की मजबूरी
संघ की कोषाध्यक्ष गीतांशु वर्मा ने कहा कि करवा चौथ के दिन निर्जला व्रत रखते हुए प्रदर्शन करना उनके लिए बेहद दुखद है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार महिला सम्मान और नारी सशक्तिकरण की बात करती है, तो महिला कर्मचारियों को अपनी जायज मांगों के लिए इस तरह विरोध क्यों करना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारी नर्सों ने मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री से अपील की कि वे उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दें और लंबित मांगों को जल्द पूरा कराएं। नर्सों ने प्रतीकात्मक रूप से चलनी के जरिए अपनी पांच सूत्रीय मांगें सरकार को दिखाईं।
राजकीय नर्सेस संघ की पांच प्रमुख मांगें
राजकीय नर्सेस संघ उत्तर प्रदेश ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं।
- गृह जनपद में तैनाती और स्थानांतरण: नर्सिंग कर्मचारियों के लिए गृह जनपद में तैनाती और स्थानांतरण की व्यवस्था लागू की जाए।
- पदोन्नति की व्यवस्था: निदेशालय से लेकर चिकित्सालय स्तर तक नर्सिंग कैडर के सभी पदों पर पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।
- बच्चों के लिए पालनाघर: अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- उच्च शिक्षा के लिए सवेतन अवकाश: नर्सिंग कैडर के कर्मचारियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बीएससी नर्सिंग की तरह सवेतन अवकाश दिया जाए।
- मेडिकल कॉलेजों में समायोजन: उच्चीकृत जिला चिकित्सालयों को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित किए जाने पर वहां कार्यरत नर्सिंग कर्मचारियों को उसी संस्थान में समायोजित किया जाए अथवा उनके पदों और सेवा संबंधी हितों को सुरक्षित रखते हुए पूर्व व्यवस्था में वापस किया जाए।
मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारी नर्सों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और आश्वासन मिलने के बावजूद समाधान नहीं हुआ है। संघ ने शासन से जल्द निर्णय लेकर आवश्यक आदेश जारी करने की अपील की है। नर्सों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
करवा चौथ के दिन हुआ यह प्रदर्शन सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत नर्सिंग कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर जारी असंतोष को सामने लाता है।
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