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पट्टीशाह का चर्चित हत्याकाण्ड: एक दर्जन को आजीवन कारावास

– दौरान मुकदमा आधा दर्जन अभियुक्तों की हो चुकी मौत
– वादी के परिजनों ने वरिष्ठ अधिवक्ता का माला पहनाकर किया स्वागत
– सजा सुनाए जाने के बाद अभियुक्तों को लेकर जाती पुलिस एवं अधिवक्ताओं का स्वागत करते वादी के परिजन।
फतेहपुर। हथगाम थाना क्षेत्र के चर्चित पट्टीशाह हत्याकांड का फैसला सुनाते हुये जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने हत्या व हत्या के प्रयास के विचारणीय मामले में विद्वान न्यायाधीश ने डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इनमें दौरान विचारण छः आरोपियों की अब तक मौत हो चुकी है। अदालत ने सभी दोषियों को 20-20 हजार रुपये के अर्थदण्ड़ का भी फैसला सुनाया। गौरतलब है कि साल 2009 में हथगाम थाना क्षेत्र के पट्टीशाह गांव में 24 नवंबर की सांयकाल करीब 4 बजे हत्याकांड़ की घटना को तब अंजाम दिया गया, जब शरीफ सेठ अपने भाई नफीस के साथ मोटर साइकिल से अपने घर जा रहे थे। उनके घर के समीप ही आपराधिक प्रवृत्ति के चर्चित माफिया रहे मजहर हैदर नकवी उर्फ मज्जू मियां अपने पुत्रों सहित 18 लोगों ने उन पर फायरिंग करना शुरू कर दिया। घटना में दोनो भाई गंभीर रूप से घायल हो गये। गोलियांे की तड़तड़ाहत सुनकर घायलों के परिजन मौके पहुंचे। दोनो भाइयों को खून से लथ-पथ देखते ही कोहराम मच गया। नफीस ने अपनी पत्नी को घटना की पूरी जानकारी दी। मृतक नफीस की पत्नी दोनों घायलों को वाहन से थाना लेकर पहुंची। हालात नाजुक होने के कारण पुलिस ने बिना देर लगायें दोनो भाईयों को तत्काल सीएचसी ले गई, जहां से उन्हें जिला अस्तपताल के लिये रिफर कर दिया गया। जिला अस्पताल के इमरजंेसी कक्ष में पहुंचते ही चिकित्सक ने उनका परीक्षण करते हुये नफीस को मृत घोषित कर दिया था और शरीफ सेठ का भर्ती कर इलाज किया गया। घटना को लेकर पुलिस को दी गई तहरीर में मज्जू मियां उनके पुत्रों सलमान, सीमाब, सिकन्दर, भाई शाहिद रजा, मांजे मोबीन, गय्यूर मसरूर, असगर, रूकनुद्दीन, रमेश चन्द्र, अब्दुल हई, बासू अमीन, तेज अली, सगीर, चन्द्र भूषण, नसीम हुसैन आदि 18 लोगों के खिलाफ हत्या व हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमा के दौरान विचारण आरोपियों मज्जू मियां, इमीन, तेग अली, सगीर, चन्द्रभूषण व नसीम की मौत हो चुकी है। वादी पक्ष की ओर वरिष्ठ एम. तारिक फरीदी व प्रमिल श्रीवास्तव तथा बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरडी शुक्ला व राजेन्द्र सिंह यादव ने अपने-अपने तर्क दिये। विद्वान न्यायाधीश पूजा विश्वकर्मा ने दोनो पक्षों के तर्क सुनने व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों एवं गवाहों के बयानों आदि को सुनते हुए घटना के दोषियों को आजीवन कारावास के साथ ही 20 हजार रुपये प्रति के अनुसार अर्थदण्ड की सजा का फैसला सुनाया। अदालत के दिये गये निर्णय की अधिवक्ताओं एवं जनता के बीच तेजी से चर्चा होती रही। उधर वादी के परिजनों ने वरिष्ठ अधिवक्ता एम. तारिक फरीदी व प्रमिल श्रीवास्तव का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया और न्यायालय के इस फैसले का स्वागत किया।

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