नई दिल्ली। UPI के जरिए होने वाले बड़े व्यापारी लेन-देन पर लागू होने वाले नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो जारी कर इस फैसले का विरोध किया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था से अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंच सकता है।
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन पर 0.4% MDR लागू होगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, बल्कि संबंधित व्यापारी भुगतान व्यवस्था में इसका भुगतान करेगा।
₹2,000 तक के UPI भुगतान पर नहीं लगेगा MDR
नई व्यवस्था में ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और Person-to-Person (P2P) ट्रांजैक्शन को शुल्क से बाहर रखा गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार करीब 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर इस बदलाव का असर नहीं पड़ेगा। सरकार का कहना है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है, बल्कि भुगतान प्रणाली से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है।
कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग शुल्क
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे कुछ क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े भुगतान पर 0.02% MDR, अधिकतम ₹300 तक, रखा गया है।
छोटे व्यापारियों को लेकर भी प्रावधान
सरकार और NPCI की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक छोटे व्यापारियों और कम मूल्य वाले डिजिटल भुगतान को इस बदलाव से बड़े स्तर पर प्रभावित नहीं करने का प्रावधान रखा गया है। UPI के संचालन, सुरक्षा और डिजिटल भुगतान ढांचे को लंबे समय तक बनाए रखने को MDR लागू करने की प्रमुख वजह बताया गया है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
UPI पर MDR लागू करने के फैसले को लेकर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस समेत विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि नए शुल्क का असर कारोबार और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि ग्राहकों से MDR नहीं लिया जाएगा और अधिकांश छोटे मूल्य के UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।
इस तरह नए MDR को लेकर एक ओर सरकार इसे UPI इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष इस फैसले के आर्थिक प्रभाव और अमेरिकी कंपनियों को संभावित लाभ को लेकर सवाल उठा रहा है।
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