फतेहपुर (गया)। बिहार के गया जिले के फतेहपुर प्रखंड में गुरुवार शाम घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। गुरपा थाना क्षेत्र की कठौतिया केवाल पंचायत स्थित रंगूनगर गांव में खेलते-खेलते चार वर्षीय मासूम पीयूष कुमार अचानक घर के समीप बने खुले बोरिंग में गिर गया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया, जबकि पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। देखते ही देखते घटनास्थल पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई और मासूम को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास शुरू कर दिए गए।
मिली जानकारी के अनुसार पीयूष कुमार, गांव निवासी दिनेश मांझी का इकलौता चार वर्षीय पुत्र है। गुरुवार की शाम वह अन्य बच्चों के साथ घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान खेलते-खेलते वह खुले पड़े बोरिंग के पास पहुंच गया और अचानक संतुलन बिगड़ने से संकरे गड्ढे में जा गिरा। घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। बच्चे के गिरते ही परिजनों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े।
सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। गुरपा थाना पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया, जबकि जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। रेस्क्यू अभियान में स्थानीय प्रशासन के साथ राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) तथा अन्य तकनीकी टीमों की भी मदद ली गई। अधिकारियों ने बच्चे तक सुरक्षित पहुंचने के लिए आधुनिक उपकरणों और तकनीकी संसाधनों का उपयोग करते हुए अभियान प्रारंभ किया।
रेस्क्यू टीम ने सबसे पहले बोरिंग की गहराई और बच्चे की संभावित स्थिति का आकलन किया। इसके बाद समानांतर गड्ढा खोदने और विशेष उपकरणों की सहायता से बच्चे तक पहुंचने की योजना बनाई गई। अभियान को तेज करने के लिए जेसीबी मशीनों और अन्य खुदाई उपकरणों को भी लगाया गया। रात होते-होते घटनास्थल पर हाईमास्ट लाइट और जनरेटर की व्यवस्था कर दी गई, ताकि अंधेरे के बावजूद बचाव कार्य बिना किसी बाधा के जारी रखा जा सके।
घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीण लगातार भगवान से मासूम की सलामती की प्रार्थना करते रहे। गांव की महिलाओं की आंखों में आंसू थे, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बच्चे की मां बार-बार अपने बेटे का नाम लेकर बेहोश हो रही थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए भरोसा दिलाया कि बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार रेस्क्यू अभियान की निगरानी करते रहे। अधिकारियों ने बताया कि अभियान पूरी सावधानी के साथ चलाया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार का जोखिम न हो। तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खुदाई और बचाव कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया। बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने सहित अन्य आवश्यक उपायों पर भी टीम लगातार काम करती रही।
यह घटना एक बार फिर खुले बोरिंग और बिना सुरक्षा के छोड़े गए गहरे गड्ढों के खतरे को उजागर करती है। देश के विभिन्न राज्यों में पहले भी इस तरह की कई दर्दनाक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें मासूम बच्चे खुले बोरवेल या बोरिंग में गिरकर हादसे का शिकार हुए हैं। सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न राज्य सरकारें कई बार ऐसे खुले बोरवेल को तत्काल बंद करने और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दे चुकी हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर लापरवाही के कारण इस प्रकार की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बोरिंग या बोरवेल का उपयोग समाप्त होने के बाद उसे तत्काल सुरक्षित तरीके से बंद करना आवश्यक है। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो वह आसपास रहने वाले लोगों, विशेषकर बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। प्रशासन भी समय-समय पर ऐसे खुले बोरवेल को बंद कराने के निर्देश जारी करता है, लेकिन कई मामलों में इनका पालन नहीं होने से दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंचने लगे। लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई। अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की कि वे रेस्क्यू अभियान में बाधा न बनें और बचाव दल को अपना कार्य सुचारु रूप से करने दें।
पूरे गांव की निगाहें रेस्क्यू अभियान पर टिकी रहीं। हर गुजरते पल के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही थी, वहीं प्रशासन और बचाव दल समय के खिलाफ संघर्ष करते हुए बच्चे तक जल्द से जल्द पहुंचने की कोशिश में जुटे रहे। गांव में रातभर कोई सामान्य गतिविधि नहीं दिखी और हर व्यक्ति मासूम पीयूष के सकुशल बाहर निकलने की प्रार्थना करता रहा।
फिलहाल प्रशासन की निगरानी में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। अधिकारी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और हर संभव संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे इलाके में दुआओं का दौर जारी है और हर किसी की जुबान पर बस एक ही प्रार्थना है कि चार वर्षीय पीयूष कुमार सुरक्षित अपने परिवार की गोद में लौट आए।
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