उदयपुर: राजस्थान के उदयपुर में लीलावास गांव है. यहां एक ही परिवार के सात बच्चों की आंखों की रोशनी धीरे-धीरे खत्म हो गई. 4 साल से लेकर 20 साल तक की उम्र के ये सभी मासूम अब पूरी तरह दृष्टिहीन हो चुके हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इतने लंबे समय तक न तो परिवार अस्पताल तक पहुंच सका और न ही प्रशासन ने उनकी सुध ली. इस अनदेखी और लापरवाही ने परिवार को अंधकार की गहरी खाई में धकेल दिया है.
यह परिवार गरीब है. घर का कोई भी सदस्य पढ़ा-लिखा नहीं है. पिता भंवरलाल मजदूरी करके घर का खर्च चलाते हैं. जब बच्चों का जन्म हुआ तो शुरुआती दो-तीन महीनों में ही माता-पिता को लगा कि उनकी आंखों में कुछ गड़बड़ी है. लेकिन इलाज की जगह परिजन अंधविश्वास की ओर मुड़ गए. वे देवी-देवताओं के दरबार में गए, मंदिरों में चांदी की आंख चढ़ाई और चमत्कार की उम्मीद की. धीरे-धीरे हालात ऐसे हो गए कि सातों बच्चे—विक्रम (4), खुशी (5), आशिक (7), पुष्कर (8), काजल (15), पायल (18) और पूजा (20)—पूर्ण रूप से अंधकार में डूब गए.
News Wani
