देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court of India) में लंबित मुकदमों की फेरहिस्त लगातार बढ़ती जा रही है. गतवर्ष के अंत तक कुल लंबित मामलों का आंकड़ा 92251 पहुंच गया. माना जा रहा है कि साल 2026 में यह लाख तक पहुंच जाएगा. गतवर्ष सितंबर माह तक यह आंकड़ा 88417 था, जिसमें 69,553 दीवानी और 18,864 आपराधिक मामले हैं।राष्ट्रीय डेटा ग्रिड के अनुसार 31 दिसंबर को 92 हजार से पार पहुंचा मौजूदा आंकड़ा अब तक का सर्वाधिक है और मामलों की बढ़ती संख्या को दर्शाता है. सन् 2014 में यह संख्या 63,000 और 2023 के अंत तक लगभग 80,000 थी, जो लगातार वृद्धि दिखाती है. चुनौती ये है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने के बावजूद लंबित मामलों का अंबार कम नहीं हो रहा है. नए मामलों के आने की दर निपटारे की दर से अधिक है, जिससे लंबित मामलों की तादाद बढ़ती जा रही है.हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2025 में 75,000 से भी ज्यादा केस का निपटारा किया है. एक तरफ भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने 75 हजार से ज्यादा मामले निपटाए हैं. वहीं अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हर साल जो हजारों केस दर्ज होते हैं, उनमें से बहस के लिए उसके पास मुश्किल से 70 से 80 मामले ही पहुंच पाते हैं. ब्रिटेन का उदाहरण ले लें. पिछले साल 29 दिसंबर तक यूके सुप्रीम कोर्ट के सामने 200 से कुछ ज्यादा केस आए और इसने लगभग 50 केस में ही फैसला सुनाया. इसके ठीक उलट भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 1,400 बड़े फैसले सुनाए और हजारों आदेश देकर मामलों का निपटारा किया.

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