नई दिल्ली: अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का विमान पिछले साल जून में क्रैश हो गया था. इस दुर्घटना में 260 लोगों की जान चली गई थी. इस दुर्घटना के 10 महीने बाद पीड़ितों के परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और ब्लैक बॉक्स डेटा जारी करने का आग्रह किया है.
एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 लंदन जा रहा था और पिछले साल 12 जून को सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. यह बोइंग 787-8 विमान था. विमान में आग लग गई, जिससे विमान में सवार 242 लोगों में से 241 लोगों की मौत हो गई. इनके अलावा, 19 और लोगों की मौत भी इसमें हो गई थी.
अब लगभग 10 महीने बाद पूरे गुजरात से लगभग 30 परिवार शनिवार को अहमदाबाद में मिले और उन्होंने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर इस आपदा के पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए CVR और ‘ब्लैक बॉक्स’ (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) का डेटा जारी करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा, “हम सच्चाई जानना चाहते हैं कि दुर्घटना किस वजह से हुई और क्या कोई तकनीकी समस्या थी.”
‘आखिर हुआ क्या था?’
इस चिट्ठी की प्रतियां एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB), डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी भेजी गईं. इसमें कहा गया है कि अगर ब्लैक बॉक्स का डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता तो कम से कम इसे पीड़ित परिवारों के साथ निजी तौर पर साझा किया जाना चाहिए. इस दुर्घटना में अपने 24 साल के बेटे को खोने वाले निलेश पुरोहित ने कहा, “मेरा घर अब खाली-खाली लगता है.” उन्होंने कहा, “कोई भी मुआवजा इस खालीपन को नहीं भर सकता. हमें पैसा नहीं चाहिए, हम बस यह जानना चाहते हैं कि आखिर हुआ क्या था.”
लोगों को कई तरह की दिक्कतें
कई लोगों के लिए, सहयोग की कमी के कारण उनका दुख और भी बढ़ गया है. वसाद की रहने वाली किंजल पटेल ने इस दुर्घटना में अपनी मां को खो दिया था. हाल ही में एयर इंडिया ने पीड़ितों के परिवारों को उनका सामान वापस दिलाने में मदद करने के लिए बनाई गई वेबसाइट का उपयोग करने में आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया. उन्होंने कि वेबसाइट पर 25 हजार से ज्यादा चीजें लिस्टेड हैं लेकिन तस्वीरें साफ नहीं हैं. कुछ भी ढूंढ पाना लगभग नामुमकीन है.
कुछ लोगों ने संपर्क की कमी को लेकर भी चिंता जताई. दुर्घटना में अपनी मां, भाई और बेटी को खोने वाले रोमिन वोरा ने कहा कि संपर्क करने के लिए सिर्फ एक ही ईमेल आईडी है और जवाब आने में 15 दिन तक लग जाते हैं. गांव में रहने वाले बहुत से लोगों को तो यह भी नहीं पता कि ईमेल इस्तेमाल कैसे किया जाता है?
कुछ महीनों में अंतिम रिपोर्ट आने की उम्मीद
इस दुर्घटना की जांच AAIB को सौंपी गई थी. AAIB ने पिछले साल जुलाई में इस पर अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंपी थी. इसमें पायलट की चूक सामने आई थी. इस साल जून में इस दुर्घटना की पहली बरसी है और उम्मीद है कि इसके आसपास इस दुर्घटना की जांच की अंतिम रिपोर्ट आ सकती है.
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