Breaking News

नेपाल की बाढ़ का खौफ: गंडक नदी में बहकर पहुंचा घर-गृहस्थी का सामान, गैस सिलिंडर और अलमारी देख ग्रामीण सहमे

कुशीनगर। नेपाल में आई भीषण बाढ़ का असर भारत में गंडक नदी के तटवर्ती इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। नेपाल की त्रिशूला नदी से तेज बहाव के साथ पानी और मलबा गंडक नदी में पहुंचने के बाद महराजगंज और कुशीनगर के सीमावर्ती गांवों में दहशत का माहौल बन गया। नदी के किनारे बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए गैस सिलिंडर, टायर, मोबिल के ड्रम, अलमारी और घर-गृहस्थी का अन्य सामान मिलने से नेपाल में हुई तबाही का अंदाजा लगाया जा रहा है।

कुशीनगर के खड्डा क्षेत्र में छितौनी तटबंध के आसपास भैसहा, मदनपुर, हनुमानगंज, लक्ष्मीपुर पड़रहवां और माघी भगवानपुर के पास गुरुवार सुबह ग्रामीणों ने नदी किनारे लकड़ियों के साथ बड़ी संख्या में सामान बिखरा देखा। ग्रामीणों ने नदी से बहकर आए सामान को बाहर निकाला।

नदी किनारे बिखरे घरेलू सामान को देखकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। लोगों का कहना है कि यदि घरों का सामान इतनी दूर तक बहकर पहुंचा है तो नेपाल में बाढ़ की स्थिति कितनी भयावह रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। नदी के बहाव के साथ बड़ी मात्रा में लकड़ियां भी किनारे जमा हो गई हैं, जिन्हें ग्रामीण जलावन के लिए बाहर निकाल रहे हैं।

बाढ़ के डर से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे ग्रामीण

नेपाल में बाढ़ की सूचना के बाद महराजगंज जिले के सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोथहा गांवों में रहने वाली करीब 10 हजार की आबादी के बीच डर का माहौल बन गया। बुधवार शाम से ही ग्रामीणों को गांव में बाढ़ का पानी पहुंचने की आशंका सताने लगी थी। कई परिवार बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को लेकर बाजार टोला स्थित ऊंचे स्थान पर पहुंच गए।

ग्रामीणों ने पूरी रात नदी के जलस्तर पर नजर बनाए रखी। गुरुवार सुबह पानी का बहाव कम होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली और अपने घरों की ओर लौटना शुरू किया। हालांकि नदी में पानी के उतार-चढ़ाव के कारण ग्रामीण अभी भी पूरी तरह बेफिक्र नहीं हैं।

सोहगीबरवा निवासी ब्रह्मानंद ने बताया कि त्रिशूला नदी में बाढ़ की जानकारी मिलने के बाद गांव में भय का माहौल बन गया था। परिवार को सुरक्षित रखने के लिए वह बाजार टोला चले गए और रात वहीं गुजारी। सुबह जलस्तर कम होने की जानकारी मिलने के बाद घर लौटे, लेकिन बाढ़ का खतरा पूरी तरह खत्म होने को लेकर अभी भी चिंता बनी हुई है।

ग्रामीण विजय प्रताप सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर नेपाल में बाढ़ के भयावह वीडियो देखने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई थी। वहीं शिकारपुर निवासी सोनू गुप्ता ने बताया कि प्रशासन की ओर से अलर्ट मिलने के बाद ग्रामीण मवेशियों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए थे।

गंडक किनारे कई गांवों में बढ़ी चिंता

निचलौल क्षेत्र में गंडक नदी के किनारे बसे कनमिशवा, भेड़िहारी, गेड़हवा, गोसाईपुर, बड़ेया, डोमा, कलनही, गुलरभार और चंदा समेत करीब 12 गांवों में भी ग्रामीण रातभर नदी के जलस्तर पर नजर रखते रहे। लोगों को परिवार और मवेशियों की सुरक्षा की चिंता बनी रही।

नेपाल की भोटे कोशी और त्रिशूला नदी में आई बाढ़ के बाद गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। फिलहाल तत्काल बाढ़ का खतरा नहीं बताया जा रहा है, लेकिन प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।

डीएम और एसपी ने तटवर्ती क्षेत्रों का किया निरीक्षण

गुरुवार को जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल और पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने नारायणी-गंडक नदी के तटवर्ती इलाकों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सोहगीबरवा पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें सतर्क रहने के निर्देश दिए।

प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर और पानी के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन की ओर से तत्काल मदद उपलब्ध कराई जाएगी। एसएसबी, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

अधूरे पुल और खराब संपर्क मार्ग की समस्या उठाई

निरीक्षण के दौरान सोहगीबरवा के ग्रामीणों ने रोहुआ नाला के पास जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अधूरे पुल और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्ग की समस्या बताई। ग्रामीणों के मुताबिक यह गांव से बाहर आने-जाने का प्रमुख रास्ता है। बारिश और बाढ़ के दौरान नाले में पानी बढ़ने से गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से अधूरे पुल का निर्माण पूरा कराने और संपर्क मार्ग को दुरुस्त कराने की मांग की है, ताकि आपदा के समय ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी न हो।

कंट्रोल रूम से हर दो घंटे में लिया जा रहा जलस्तर का अपडेट

गंडक नदी में पानी के बढ़ते-घटते बहाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम को सक्रिय कर दिया है। खड्डा और तमकुहीराज तहसील के तटीय एवं निचले इलाकों में स्थिति पर नजर रखने के लिए आपदा प्रबंधन समेत कई विभागों की टीमें तैनात की गई हैं।

स्वास्थ्य, पुलिस, पशुपालन, पंचायती राज और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी 24 घंटे निगरानी में लगाए गए हैं। वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े जा रहे पानी और गंडक नदी के जलस्तर की जानकारी हर दो घंटे में ली जा रही है।

जिला प्रशासन ने बाढ़ या किसी अन्य आपदा की स्थिति में सूचना देने के लिए 05564240590 और टोल फ्री नंबर 1077 जारी किया है। इसके अलावा चार हंट लाइन नंबर भी सक्रिय किए गए हैं।

नेपाल से बहकर गंडक नदी के किनारे पहुंच रहा घरेलू सामान इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता की तस्वीर सामने ला रहा है। नदी के किनारे मिले सिलिंडर, टायर, अलमारी और अन्य सामान ग्रामीणों के लिए सिर्फ वस्तुएं नहीं, बल्कि नेपाल में आई तबाही की एक गंभीर चेतावनी भी हैं।

About NW-Editor

Check Also

नेपाल बाढ़ की तबाही से 400 अरब नेपाली रुपये के नुकसान का अनुमान, 5 हजार लोग अब भी लापता; 1,344 शव मिले

नेपाल। 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *