नई दिल्ली। लुटियंस दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर पिछले 12 वर्षों में हुए करीब 547.68 करोड़ रुपये के खर्च को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरटीआई से सामने आए आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया गया है कि इतनी बड़ी राशि का इस्तेमाल सरकारी स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाओं को बेहतर करने में किया जा सकता था।
आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 में मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर करीब 27 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। यह रकम बढ़कर 2025-26 में करीब 92 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसी को लेकर विपक्षी राजनीतिक समूह ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग की है।
12 साल में 547 करोड़ से ज्यादा खर्च
दावों के अनुसार, वर्ष 2014 से 2019 के बीच मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव पर करीब 133.9 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 2019 से 2024 के बीच यह खर्च बढ़कर लगभग 250 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2024 से 2026 के बीच करीब 174.5 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई है। इस तरह 12 वर्षों में कुल खर्च 547.68 करोड़ रुपये बताया गया है।
सरकारी स्कूलों की सुविधाओं पर उठे सवाल
इस खर्च को लेकर सवाल उठाने वालों का कहना है कि ग्रामीण सरकारी स्कूलों में आज भी कई जगह बिजली, पीने के पानी, शौचालय और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। उनका तर्क है कि सरकारी धन के इस्तेमाल में शिक्षा और बच्चों की मूलभूत जरूरतों को अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चलाने की बात कही गई है। अभियान के तहत स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण कराने और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने की मांग की जा रही है।
पीएम केयर्स निधि को लेकर भी सवाल
सरकारी स्कूलों की सुविधाओं के मुद्दे के साथ पीएम केयर्स निधि को लेकर भी सवाल उठाए गए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पीएम केयर्स निधि की राशि 2023-24 में करीब 7,173 करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 में बढ़कर करीब 8,452 करोड़ रुपये हो गई।
हालांकि, इस निधि का गठन आपातकालीन परिस्थितियों और आपदा राहत जैसे उद्देश्यों के लिए किया गया है। इसलिए इसके इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस भी सामने आती रही है।
भाजपा ने आरोपों को बताया राजनीतिक बयानबाजी
इन आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा का कहना है कि पीएम केयर्स निधि का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों और आपदा राहत में सहायता देना है। पार्टी ने आरोप लगाने वालों पर गलत जानकारी के आधार पर राजनीतिक माहौल बनाने का आरोप लगाया।
भाजपा ने इस मुद्दे पर अभिजीत दीपके को पंजाब जाकर वहां के सरकारी स्कूलों की स्थिति देखने की चुनौती भी दी। पार्टी ने पंजाब सरकार के ‘विश्वस्तरीय स्कूलों’ के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले वहां की स्थिति का भी जायजा लिया जाना चाहिए।
खर्च और शिक्षा व्यवस्था पर बहस तेज
मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर हुए खर्च और सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठे सवालों ने सरकारी धन की प्राथमिकताओं पर बहस तेज कर दी है। एक पक्ष स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने के लिए धन खर्च करने की मांग कर रहा है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया है।
News Wani
