देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर सामने आए एक सर्वे में कई चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के मुताबिक, करीब 9% छात्रों ने बताया कि उन्हें अक्सर आत्महत्या का विचार आता है, जबकि 34% छात्रों ने कहा कि वे अपने ही कैंपस में खुद को बाहरी या अलग-थलग महसूस करते हैं।
देशभर से जुटाए गए इस सर्वे में 2.43 लाख से अधिक छात्रों के जवाब शामिल किए गए हैं। इनमें करीब 67% छात्र एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों से संबंधित थे। सर्वे में लगभग 15% छात्रों ने बताया कि पिछले छह महीनों में उन्हें किसी समय बेहद ज्यादा तनाव या कई हफ्तों तक एंग्जाइटी का सामना करना पड़ा।
प्रशासन पर आधे से ज्यादा छात्रों को भरोसा
सर्वे में छात्रों से संस्थान के प्रशासन को लेकर भी सवाल किए गए। करीब 56% छात्रों ने कहा कि गंभीर मामलों को निष्पक्ष तरीके से संभालने के लिए उन्हें अपने संस्थान के प्रशासन पर भरोसा है। इससे यह संकेत मिलता है कि छात्रों की मानसिक सेहत से जुड़े मामलों में संस्थागत सहायता और भरोसे की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञों ने शुरुआती संकेत पहचानने पर दिया जोर
मनोवैज्ञानिक डॉ. जेपी अग्रवाल के अनुसार, छात्रों में आत्महत्या के जोखिम को कम करने के लिए शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान जरूरी है। इसके लिए शिक्षकों, काउंसलरों और हॉस्टल वार्डन को गेटकीपर ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए प्रशिक्षित करने की जरूरत बताई गई है। छात्रों को भी तनाव, अवसाद और आत्महत्या के जोखिम से जुड़े शुरुआती संकेतों के बारे में जागरूक किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सहायता सेवाओं और हेल्पलाइन की जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है। साथ ही, छात्र आत्महत्या के अलग-अलग कारणों को समझने के लिए मनोवैज्ञानिक अध्ययन को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।
उच्च शिक्षा में दाखिले बढ़े, आत्महत्या की दर भी बढ़ी
आंकड़ों के मुताबिक, 2011 से 2022 के बीच उच्च शिक्षा में दाखिल छात्रों की संख्या 2.92 करोड़ से बढ़कर 4.33 करोड़ हो गई। इसी अवधि में प्रति एक लाख छात्रों पर आत्महत्या की दर 26.37 से बढ़कर 30.02 हो गई।
यह आंकड़े उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मानसिक सेहत, तनाव और सामाजिक जुड़ाव से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
IIT बॉम्बे में छात्र की मौत के बाद कैंपस में प्रदर्शन
18 सितंबर 2026 को मुंबई स्थित IIT बॉम्बे में सेकेंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे की मौत का मामला सामने आया था। वह महाराष्ट्र के यवतमाल का रहने वाला था और एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था।
घटना के बाद कैंपस में करीब 400 छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छात्र को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था और उस पर क्वेश्चन पेपर की तस्वीर चैटजीपीटी पर अपलोड कर नकल करने की कोशिश का आरोप था।
छात्रों की मानसिक सेहत से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ लगातार समय पर काउंसलिंग, संस्थागत सहायता और शुरुआती स्तर पर जोखिम के संकेतों की पहचान को महत्वपूर्ण मानते हैं।
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