– सभा में कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा, प्रदर्शन कर सीएम को भेजा ज्ञापन
– दोषियों पर कार्रवाई, घायलों को मुआवजा व अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग
– लखनऊ लाठीचार्ज के विरोध में अधिवक्ताओं ने हड़ताल कर मांगा न्यायआम सभा को संबोधित करते बार अध्यक्ष बाबू सिंह यादव।
फतेहपुर। लखनऊ में अधिवक्ताओं पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ता सामूहिक रूप से न्यायिक कार्य से विरत रहे। अधिवक्ताओं ने आम सभा कर जहां लाठीचार्ज का विरोध किया वहीं कलेक्ट्रेट में जमकर नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दोषी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई, घायलों को मुआवजा तथा अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू किए जाने की मांग उठाई। जिला बार एसोसिएशन की आम सभा की बैठक सिविल बार हाल में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता बार अध्यक्ष बाबू सिंह यादव ने की, जबकि संचालन महामंत्री अनुराग नारायण उर्फ पुत्तन मिश्र ने किया। बैठक में बार की दुकानों का किराया बढ़ाए जाने, बार की संपत्ति पर अवैध कब्जा किए लोगों को बेदखल करने, अधिवक्ता कल्याण हेतु ट्रस्ट गठन कर कोष व्यवस्था सुनिश्चित करने समेत विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई। इसके अलावा कचहरी परिसर में वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने, वकालतनामा शुल्क बढ़ाने तथा अधिवक्ता हित एवं बार को मजबूत बनाने संबंधी अन्य प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ताओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाना समय की आवश्यकता है। तत्पश्चात अधिवक्ता नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी के माध्यम से सीएम को भेजे गए ज्ञापन में लखनऊ में अधिवक्ताओं पर किए गए लाठीचार्ज का विरोध दर्ज कराया। सीएम से मांग किया कि इस मामले में दोषी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके कड़ी कार्रवाई की जाए, घायल अधिवक्ताओं को मुआवजा दिया जाए व अधिवक्ता की सुरक्षा हेतु प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो अधिवक्ता आंदोलन के लिए विवश हो जाएंगे। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी। इस मौके पर अधिवक्ताओं में कैलाश प्रताप सिंह, सुशील मिश्र, हितेंद्र सिंह, मणि प्रकाश दुबे, आफताब अहमद, प्रवीण द्विवेदी, इंद्रजीत यादव, वागीश श्रीवास्तव, चंद्र प्रकाश गुप्त, सुनील गुप्ता, मंजुला राजपूत, पुष्पा देवी मौर्य, सतीश शर्मा, दीपचंद्र त्रिपाठी, अविनाश सिंह, महाप्रसाद दुबे, आयशा साहब, निकेता सोनकर, सनत कुमार निषाद सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।

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