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आंधी-तूफान के एक सप्ताह बाद भी गांवों में अंधेरा

– बिजली बहाली की धीमी रफ्तार से ग्रामीणों में आक्रोश
– भीषण गर्मी में बिजली-पानी संकट गहराया, मोबाइल चार्ज करने तक को भटक रहे लोग
फतेहपुर। बीते तेरह मई को जनपद में आई तेज आंधी और तूफान ने भारी तबाही मचाई थी। जहां इस प्राकृतिक आपदा में कई लोगों की जान चली गई, वहीं सैकड़ों परिवारों के आशियाने भी उजड़ गए। आंधी-तूफान का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों की विद्युत व्यवस्था पर पड़ा, जहां बिजली के खंभे और तार बड़ी संख्या में क्षतिग्रस्त हो गए। आंधी के बाद एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जिले के तमाम गांव आज भी अंधेरे में डूबे हुए हैं। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांवों में न तो पानी की सप्लाई सुचारु हो पा रही है और न ही लोग अपने मोबाइल तक चार्ज कर पा रहे हैं। शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत विभाग गांवों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है और मरम्मत कार्य बेहद धीमी गति से किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि विभाग की कार्यशैली कछुए की चाल जैसी हो गई है, जिससे ग्रामीणों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बताया जा रहा है कि खागा तहसील, बिंदकी तहसील और सदर तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में अब तक विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। कई गांव ऐसे हैं जहां तूफान के बाद से अभी तक विभाग का कोई कर्मचारी तक नहीं पहुंचा। टूटे खंभे और जमीन पर पड़े तार अब भी ग्रामीणों के लिए खतरा बने हुए हैं। भीषण गर्मी के चलते हालात और भी बदतर हो गए हैं। बिजली न होने से पंखे, कूलर और पानी की मोटरें बंद पड़ी हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और विद्युत विभाग से जल्द से जल्द क्षतिग्रस्त विद्युत लाइनों को दुरुस्त कर आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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