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“अमेरिका दबाव से भारत नहीं झुका! रूसी तेल के बाद मक्का पर भी टैरिफ”

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता पर बातचीत हो रही है लेकिन अमेरिका अभी भी भारत पर दबाव बनाने से बाज नहीं आ रहा है। दरअसल अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने चेतावनी दी है कि अगर भारत, अमेरिका में उगाए गए मक्का को खरीदने से इनकार करता है तो उसकी भी अमेरिकी बाजार में एंट्री बंद हो सकती है। एक ताजा इंटरव्यू में लुटनिक ने धमकी दी कि अगर भारत अपने टैरिफ कम नहीं करता है तो उसे मुश्किल समय का सामना करना पड़ सकता है। लुटनिक का बयान ऐसे समय सामने आया है, जब खुद राष्ट्रपति ट्रंप भारत के प्रति रुख में नरमी ला रहे हैं।

भारत को अपनी मक्का बेचना चाहता है अमेरिका
लुटनिक ने दावा किया कि ‘भारत-अमेरिका संबंध एकतरफा हैं। उन्होंने कहा कि वे हमें अपना सामान बेचते हैं और हमारा फायदा उठाते हैं। वे हमें अपनी अर्थव्यवस्था से बाहर रखते हैं, जबकि हम उनके लिए पूरी तरह से खुले हैं।’ लुटनिक ने कहा कि ‘भारत शेखी बघारता है कि उसके पास 1.4 अरब लोग हैं। क्या 1.4 अरब लोग एक बुशल अमेरिकी मक्का नहीं खरीद सकते? वे हमें सबकुछ बेचते हैं और हमारा मक्का नहीं खरीदते? वे हर चीज पर टैरिफ लगाते हैं।

‘बुशेल एक मात्रा की इकाई है, जो सूखी चीजों के लिए होती है और यह करीब 35.2 लीटर के बराबर होती है। लुटनिक ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से कहा है, ‘अपने टैरिफ कम करो, जैसा हम तुम्हारे साथ करते हैं वैसा ही हमारे साथ करो।’ लुटनिक ने कहा, ‘यह राष्ट्रपति की नीति है, और या तो आप इसे मान लीजिए, या फिर दुनिया के सबसे बड़े ग्राहक (अमेरिका) के साथ व्यापार करना आपके लिए मुश्किल हो जाएगा।’

भारत अमेरिकी मक्का क्यों नहीं खरीदता
अमेरिका में उगाया गया मक्का ज्यादातर आनुवंशिक रूप से बदला हुआ (जैविक रूप से संशोधित – GM) होता है, जबकि भारत में GM मक्का का उपयोग नहीं किया जाता। न तो भारत में इसका आयात होता है और न ही किसान इसे उगा सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि GM मक्का मिट्टी या पशुओं के माध्यम से खाद्य श्रृंखला में न घुस पाए। यही कारण है कि नीति आयोग द्वारा इथेनॉल के लिए जीएम मक्का उगाने के प्रस्ताव को भी रद्द कर दिया गया। अमेरिकी मक्का की किस्में आनुवंशिक रूप से संशोधित हैं, इसलिए यह दुनिया की सबसे सस्ती किस्मों में से एक है। इसका उपयोग न केवल मानव उपभोग के लिए, बल्कि सीधे पशु चारे के रूप में भी किया जाता है।गौरतलब है कि रूस से तेल खरीदने के चलते अमेरिका ने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है, जिसके बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया है। इसके चलते दोनों देशों के रिश्तों में खटास भी आई है। हाल के हफ्तों में ट्रंप और उनके शीर्ष अधिकारियों ने भारत की रूस से तेल खरीद के लिए आलोचना की है। उनका कहना है कि भारत इस तरह से यूक्रेन युद्ध को फंड कर रहा है, हालांकि भारत ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि अमेरिका की ये कार्रवाइयां अनुचित, अन्यायपूर्ण और गैर-वाजिब हैं। भारत ने अपने बचाव में कहा है कि तेल की खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की स्थिति के अनुसार की जाती है, न कि किसी राजनीतिक दबाव में।

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