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“हॉर्मुज़ संकट के बीच भारत को गैस का खजाना, अरब देशों में बढ़ी बेचैनी”

मिडिल ईस्ट में युद्ध की आहट फिर से आने लगी है। स्टेट ऑफ हॉर्बुज में फंस गए हैं जहाज और दुनिया की सांसे फिर से अटक गई है डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद। लेकिन इसी बीच भारत ने एक ऐसा दांव चला जिसने अरब देशों को भी सोचने पर मजबूर कर डाला। जी हां, ओसा के समुंदर के नीचे एक ऐसा खजाना मिला है जो भारत की किस्मत बदल सकता है। हाल ही में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव इतना बढ़ चुका है कि पूरी दुनिया की नजरें सिर्फ एक ही जगह पर टिक गई है और वह जगह है स्टेट ऑफ हॉर्मोज। यानी यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। भारत के कई तेल और गैस से भरे जहाज भी यहीं पर फंस गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक सिर्फ नौ जहाज ही भारत पहुंच पाए हैं जबकि 15 जहाज अभी भी रास्ते में अटके हुए हैं। हालांकि युद्ध विराम का ऐलान हो चुका था लेकिन उसके बाद ईरान अमेरिका की बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला और यह मध्यस्था की डील भी पाकिस्तान की ओर से थी जो कि बैक फायर कर गई। लेकिन खतरा और बढ़ता चला गया। इसलिए भारतीय नेवी और सुरक्षा एजेंसियां अब हाई अलर्ट पर है। अब इस पूरे संकट ने भारत को एक बहुत बड़ा सबक दिया है कि अगर ऊर्जा के लिए आप किसी एक क्षेत्र पर निर्भर हैं तो आपकी अर्थव्यवस्था हमेशा खतरे में रहेगी और यही वजह है कि भारत ने पिछले दो से तीन सालों में अपनी ऊर्जा नीति को पूरी तरह से बदल दिया है।

अब फोकस है एनर्जी इंडिपेंडेंस यानी कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता और इसी मिशन में सबसे बड़ा ब्रेथ मिला है भारत को ओसा के महानदी बेसिन में। बंगाल की खाड़ी के नीचे छिपा यह क्षेत्र अब भारत के लिए सबसे बड़ा गेम चेंजर बन सकता है। यहां पर जो गैस मिली है वो अल्ट्रा डीप वाटर में है। 2000 मीटर से भी ज्यादा गहराई में है। अब सोचिए इतनी गहराई में जाकर गैस निकालना कितना मुश्किल है। लेकिन भारत ने यह कर दिखाया। यह खोज ओएलपी यानी ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत हुई जो ज्यादा कंपनियों को एक्सप्लोरेशन करने का मौका देती है और सबसे बड़ी बात यह सिर्फ एक गैस फील्ड नहीं है। यहां कई गैस पॉकेट्स मिलने की संभावना बताई जा रही है, जताई जा रही है।

इस खोज का सबसे पहला फायदा मिलेगा उड़ीसा के पारादीप और धामरा पोर्ट को जहां अब इंपोर्टेड गैस की जगह घरेलू गैस का इस्तेमाल हो सकेगा। अब इसका असर यह होगा कि गैस सस्ती हो जाएगी। इंडस्ट्री की लागत कम हो जाएगी और उत्पादन बढ़ जाएगा। स्टील सेक्टर, फर्टिलाइजर सेक्टर जैसे बड़े-बड़े सेक्टर को सीधा फायदा मिल जाएगा। टाटा स्टील जैसे प्लांट को सस्ती गैस मिलेगी और आम आदमी भुवनेश्वर, कटक पूरी जैसे शहरों में पीएनजी और सीएनजी सस्ती हो जाएगी। लेकिन कहानी इतनी आसान नहीं है। डीप सी ड्रिलिंग बेहद मुश्किल काम है। बंगाल की खाड़ी में चक्रवात, हाई प्रेशर, टेक्निकल चैलेंज ये सब इस प्रोजेक्ट को जोखिम भरा बनाते हैं।

 

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