‘हम इंडिया से नेपाल घूमने आए थे। अब काठमांडू में फंस गए हैं। यहां हालात ठीक नहीं हैं। हमारे घर वाले टेंशन में हैं कि क्या होगा। किसी को फोन नहीं लगा। हमने इंडियन एंबेसी से बात करने की कोशिश की, लेकिन मदद नहीं मिली। हमारी बात ही नहीं हो पाई।’ महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाले श्रीपाद कवाष्ठे से बातचीत में अपनी परेशानी बताते हैं। वे 35 लोगों के ग्रुप में नेपाल गए थे, तभी वहां हिंसा भड़क गई। फिलहाल नेपाल में अब तक 30 मौतें हो चुकी हैं। सरकार की गैरमौजूदगी में सेना ने कंट्रोल कर लिया है। काठमांडू की सड़कों पर हर शख्स की तलाशी ली जा रही है।
हालांकि शुरुआती दो दिन के मुकाबले 10 सितंबर को हिंसा कम हो गई। PM ओली के इस्तीफे के बाद अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की सबसे आगे चल रहा है। उनका नाम GenZ ग्रुप ने तय किया है। इस बीच, पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ की बेटी गंगा दहल के घर से एक डेडबॉडी मिली है। प्रदर्शनकारियों ने ढोलाहिटी के इस घर में आग लगा दी थी। डेडबॉडी किसी पुरुष की है, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो सकी है। हिंसा की वजह से नेपाल में 1 हजार से ज्यादा भारतीय फंस गए हैं। इनमें महाराष्ट्र के 300 लोग बताए जा रहे हैं।
‘पूरे दिन होटल में बंद रहे, खिड़की से जलता काठमांडू देखा’ काठमांडू के होटलों में कुछ भारतीय टूरिस्ट फंसे हैं। इसी दौरान महाराष्ट्र के श्रीपाद से बात हुई। श्रीपाद बताते हैं, ‘हम दो दिन पहले नेपाल पहुंचे थे। उस दिन भी प्रोटेस्ट चल रहा था। हमारी 10 सितंबर को दोपहर 2 बजे वापसी की फ्लाइट थी। अभी हम कुछ नहीं कह सकते कि क्या होगा। यहां लोगों ने बहुत बुरा हाल कर दिया है। सब कुछ जला दिया। हमारे घरवाले बहुत डरे हुए हैं।’
अमोल शैलार भी महाराष्ट्र से नेपाल घूमने आए थे। वे कहते हैं, पूरे दिन होटल में ही बंद रहे। सिर्फ खिड़की से काठमांडू को देखते रहे। पूरा शहर धुआं-धुआं दिख रहा है। हमारे वापस जाने का कुछ भी रास्ता नहीं बन पा रहा है।
अमोल की तरह ही आशीष दाबाड़े भी होटल में फंसे हैं। वे कहते हैं, ‘हम होटल से बाहर निकले थे। बाहर देखा कि लोग चिल्ला रहे हैं। हर तरफ भीड़ थी। ये सब बहुत भयानक था। हमें तो बहुत डर लग रहा था। मोबाइल नेटवर्क भी बंद हो गया। घर पर बात नहीं हो पा रही थी।’
‘हमने एंबेसी से कॉन्टैक्ट किया। उन्होंने कहा कि आप होटल के कमरे में ही रुको। फिलहाल होटल से बाहर मत निकलना। वे कह रहे हैं कि हमें भारत वापस पहुंचाने का इंतजाम करेंगे। हालांकि अब तक तो कुछ नहीं हुआ। सरकार को हमारी वापसी के लिए फ्लाइट चलानी चाहिए।’
आशीष और अमोल अब एयरपोर्ट खुलने और फ्लाइट शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि नेपाल घूमने आए सुदर्शन दाबाड़े इंतजार नहीं करना चाहते। वे कहते हैं कि हमारे पास सड़क के रास्ते 9 घंटे ट्रैवल करके जाने का भी विकल्प है। हम अभी ये रिस्क लेने की स्थिति में नहीं है। नेपाल में लॉ एंड ऑर्डर खत्म हो गया है। सड़क के रास्ते जाने में बहुत खतरा है।
इस बीच एअर इंडिया ने कहा है कि वह भारतीयों को निकालने के लिए दिल्ली और काठमांडू के बीच स्पेशल फ्लाइट चला रही है। 11 सितंबर से शेड्यूल फ्लाइट भी शुरू हो जाएंगी। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नेपाल में फंसे एक हजार से ज्यादा लोगों की वापसी के लिए फॉरेन सेक्रेटरी से बात की। खड़गे ने कहा, ‘सरकार को नेपाल में फंसे भारतीय टूरिस्ट की सुरक्षा करनी चाहिए। कई लोग एयरपोर्ट पर हैं। कई सड़कों पर और होटलों में हैं। मैंने इस पर विदेश सचिव से बात की। उन्होंने कहा कि वहां फंसे लगभग 1,000 भारतीयों को जल्द ही वापस लाया जाएगा।’
सुबह तक धधकता रहा सिंह दरबार और संसद भवन: भारतीयों से मुलाकात के बाद हम काठमांडू में हिंसा के बाद के हालात देखने निकले। सबसे पहले संसद पहुंचे। 9 सितंबर को यहां 10 हजार से ज्यादा लोग घुस गए थे। पूरी बिल्डिंग में आग लगा दी। इससे ये बिल्डिंग पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।
बिल्डिंग के कुछ हिस्से अब भी धधक रहे हैं। पार्लियामेंट में पिलर और छत के अलावा कुछ नहीं बचा। सामान, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, फाइलें, सब राख हो चुका है। वीरान पड़ी इस बिल्डिंग में अब सिर्फ सेना के जवान हैं। इसके बाद हम सुप्रीम कोर्ट और सिंह दरबार गए। वहां भी हर तरफ आगजनी के बाद काला पड़ चुका मलबा पड़ा हुआ है। नेपाल का पावर हाउस रहा सिंह दरबार बर्बाद हो चुका है। यहां सेना के जवान सफाई करते दिखे।
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