सऊदी अरब में बुधवार देर रात एयरपोर्ट और तेल ठिकाने को निशाना बनाकर किए गए हमलों में एक भारतीय समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हो गए। घायलों में तीन भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। लगातार हो रहे हमलों से सऊदी अरब में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
दम्माम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई, जबकि दो भारतीयों समेत आठ लोग घायल हुए। वहीं, अरामको के तेल ठिकाने पर ड्रोन हमले में नेपाल और फिलीपींस के एक-एक नागरिक की मौत हो गई। इस घटना में एक भारतीय समेत दो लोग घायल हुए।
बताया जा रहा है कि इस महीने सऊदी अरब में कई बड़े हमले हुए हैं। बीते 16 दिनों में छह प्रमुख हमलों के कारण जान-माल का नुकसान हुआ है। इन घटनाओं में कम से कम 23 लोगों की मौत और 370 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
हमले के बाद एयरपोर्ट पर उड़ानों का बदला गया रास्ता
सऊदी अरब की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने गुरुवार को दम्माम एयरपोर्ट पर हमले की जानकारी दी। हमले में एयरपोर्ट को भी नुकसान पहुंचा है। घटना के बाद विमानों की आवाजाही प्रभावित हुई और कई उड़ानों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा गया।
दम्माम फारस की खाड़ी के तट पर स्थित एक प्रमुख शहर है, जो बहरीन और कतर के नजदीक है। इस क्षेत्र में हवाई यातायात और तेल प्रतिष्ठानों की रणनीतिक अहमियत काफी अधिक है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने यह भी बताया कि उसने देश के पूर्वी हिस्से में चार ड्रोन हमलों को नाकाम किया।
अक्टूबर में लगातार निशाने पर रहे प्रमुख ठिकाने
इस महीने सऊदी अरब के विभिन्न एयरपोर्ट और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। 6 अक्टूबर को जिजान और नजरान के एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की जानकारी मिली। 7 अक्टूबर को रियाद और अभा एयरपोर्ट पर हमलों की खबर आई, जबकि 8 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर एक और हमला हुआ।
10 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमले में 13 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद उड़ानों पर भी असर पड़ा। 11 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट के पास मिसाइल या ड्रोन गिरने की घटना में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत और 11 लोगों के घायल होने की खबर सामने आई।
लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिका ने अपने राजनयिकों की सुरक्षा बढ़ाई
क्षेत्र में बढ़ते खतरे के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब में अपने कुछ राजनयिकों और सरकारी कर्मचारियों को उनके परिवारों के साथ देश छोड़ने के लिए कहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कर्मचारियों और उनके परिजनों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया है।
अमेरिकी प्रशासन ने नागरिक एयरपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं पर हो रहे हमलों को सुरक्षा संबंधी चिंता की वजह बताया है। इससे पहले अमेरिकी दूतावास को भी क्षेत्र में सैन्य संघर्ष के शुरुआती दौर में नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी।
अमेरिकी मीडिया में संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, कतर और बहरीन से भी कुछ कर्मचारियों को हटाए जाने की खबरें आईं। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन देशों से कर्मचारियों को हटाने के आदेश की खबरों को गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी व्यवस्था सऊदी अरब के लिए की गई है।
पश्चिम एशिया में बढ़ सकता है तनाव
पश्चिम एशिया में बढ़ते हमलों के बीच अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तैनाती में बदलाव की खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिकी सेना की ओर से नियमित सैन्य गतिविधियों और मिशन की तैयारियों के तहत कर्मियों को अलग-अलग स्थानों पर भेजे जाने की बात कही गई है।
सऊदी अरब में एयरपोर्ट और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि हमले जारी रहते हैं, तो हवाई यातायात, तेल आपूर्ति और वहां काम कर रहे विदेशी नागरिकों की सुरक्षा पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
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