नैरोबी, केन्या। केन्या में धर्म के नाम पर लोगों को भूखा रखकर मौत के मुंह में धकेलने के सनसनीखेज मामले में धर्मगुरु पॉल मैकेंजी और उसके करीब 30 सहयोगियों को अदालत ने दोषी करार दिया है। इस मामले में 190 बच्चों और एक वयस्क की मौत से जुड़ा फैसला सुनाया गया है। अदालत 6 नवंबर को दोषियों की सजा का ऐलान करेगी।
जांच के दौरान शाकाहोला जंगल में सामूहिक कब्रें मिलने से इस मामले ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था। अब तक जंगल से 400 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि, सभी मौतों की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
स्वर्ग पहुंचने का सपना दिखाकर लोगों को किया गुमराह
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पॉल मैकेंजी गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च के माध्यम से धार्मिक गतिविधियां चलाता था। आरोप है कि उसने दुनिया के अंत की भविष्यवाणी करते हुए अपने अनुयायियों को विश्वास दिलाया कि भूखे रहने से उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होगी।
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, लोगों को चरणबद्ध तरीके से भूखा रखने की योजना बनाई गई थी। पहले बच्चों, फिर महिलाओं और युवा लड़कों तथा आखिर में अन्य पुरुषों को निशाना बनाने की बात कही गई।
मैकेंजी ने हत्या के आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि उसने किसी को जबरन भूखा रहने के लिए मजबूर नहीं किया। हालांकि, अदालत ने इस मामले में उसे दोषी ठहराया।
शाकाहोला जंगल में मिलीं सैकड़ों कब्रें
इस मामले का खुलासा मार्च 2023 में होना शुरू हुआ, जब एक स्थानीय व्यक्ति ने पुलिस को अपने भाई और भाभी के बच्चों की मौत से जुड़ी जानकारी दी। आरोप था कि बच्चों को धार्मिक निर्देशों के नाम पर भूखा रखा गया था।
इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की और अप्रैल 2023 में मैकेंजी को दोबारा गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने शाकाहोला जंगल में तलाशी अभियान तेज किया, जहां सामूहिक कब्रों से बड़ी संख्या में शव निकाले गए।
इस मामले में 191 मौतों से संबंधित मुकदमे में अदालत ने फैसला सुनाया है। अन्य मौतों की जांच और उनसे जुड़े कानूनी मामले अलग से जारी हैं।
बच्चों को स्कूल और अस्पताल जाने से भी रोकने का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मैकेंजी अपने अनुयायियों को बच्चों को स्कूल भेजने से रोकता था। बीमार होने पर अस्पताल जाने की भी मनाही थी। वह कथित तौर पर इन संस्थानों को शैतान से जुड़ा बताता था।
उसके अनुयायी जंगल में प्लास्टिक की चादरों और सूखी घास से बनी अस्थायी झोपड़ियों में रहते थे। उनके रहने के स्थानों को बाइबिल से जुड़े नाम दिए गए थे, जिनमें यरुशलम और यहूदिया भी शामिल थे।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने बताया कि कुछ बच्चों को उनके परिवारों से अलग कर दिया गया था और उन्हें भोजन नहीं दिया गया। उनके माता-पिता के सामने हुई इन घटनाओं ने मामले की गंभीरता को उजागर किया।
2017 से पुलिस की निगरानी में था धर्मगुरु
पॉल मैकेंजी पहले से ही केन्या के अधिकारियों की नजर में था। वर्ष 2017 में पुलिस ने उसके ठिकाने की तलाशी ली थी। बाद में 2019 में उसके चर्च को बंद कराया गया, जिसके बाद वह शाकाहोला जंगल में रहने चला गया।
इस मामले ने केन्या में धार्मिक संगठनों की निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। घटना के बाद धार्मिक संस्थाओं पर नियंत्रण और लोगों को कट्टरपंथी विचारों से बचाने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग भी तेज हुई है।
मैकेंजी पर इस मामले के अलावा अन्य आरोपों से जुड़े मुकदमे भी चल रहे हैं। उसने उन आरोपों से भी इनकार किया है। अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अब सभी की नजर 6 नवंबर को होने वाली सजा की घोषणा पर है।
News Wani
