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कब्रिस्तान की पांच एकड़ जमीन पर बस गई कॉलोनी, जांच में 69 मकानों का खुलासा

 अमरोहा। राजस्व अभिलेखों में कब्रिस्तान के नाम दर्ज करीब पांच एकड़ भूमि पर पिछले एक दशक में पूरी कॉलोनी बस जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिकायत के बाद कराई गई प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ कि तीन अलग-अलग गाटा संख्याओं की जमीन पर 69 लोगों ने मकान बना लिए हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है और अब आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद बीते कई वर्षों में धीरे-धीरे इस जमीन पर निर्माण कार्य होते रहे और देखते ही देखते वहां पूरी बस्ती आकार लेने लगी। स्थानीय स्तर पर लोगों ने मकान बनाकर रहना शुरू कर दिया, लेकिन लंबे समय तक इस ओर जिम्मेदार विभागों का ध्यान नहीं गया। अब शिकायत के आधार पर जब जांच कराई गई तो पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।

प्रशासनिक जांच में पाया गया कि तीन गाटा संख्याओं में दर्ज भूमि पर कुल 69 मकान बने हुए हैं। जांच टीम ने मौके का निरीक्षण कर निर्माणों की स्थिति, कब्जाधारकों की संख्या और राजस्व अभिलेखों का मिलान किया। रिपोर्ट में यह भी दर्ज किया गया है कि जिस भूमि का उपयोग सार्वजनिक कब्रिस्तान के रूप में होना चाहिए था, उस पर निजी आवासीय निर्माण कर लिए गए।

मामला सामने आने के बाद तहसील प्रशासन ने रिपोर्ट का परीक्षण शुरू कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यदि निर्माण अवैध पाए जाते हैं तो संबंधित कब्जाधारकों को नोटिस जारी किए जा सकते हैं। इसके बाद नियमों के अनुसार बेदखली, जुर्माना या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कब्जा एक दिन में नहीं हुआ, बल्कि वर्षों से धीरे-धीरे निर्माण होते रहे। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि जब जमीन राजस्व अभिलेखों में कब्रिस्तान के नाम दर्ज थी, तो इतने बड़े पैमाने पर निर्माण होने के दौरान जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौन क्यों रहे। लोगों ने मांग की है कि केवल कब्जाधारकों पर ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

कब्रिस्तान की भूमि पर कॉलोनी बसने का मामला सामाजिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है। धार्मिक स्थल या सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कब्जे के मामले में प्रशासन को बेहद सतर्कता के साथ कार्रवाई करनी होती है, ताकि कानून व्यवस्था प्रभावित न हो और वैधानिक प्रक्रिया भी पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़े।

राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा रही है। अभिलेखों में दर्ज रकबा, मौके पर निर्माण और कब्जाधारकों की जानकारी को संकलित किया जा रहा है। इसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस खुलासे ने अमरोहा में भूमि प्रबंधन और राजस्व निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते संबंधित भूमि की निगरानी की जाती तो संभवतः इतने बड़े पैमाने पर कब्जा नहीं हो पाता। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कदम उठाता है तथा कब्रिस्तान के नाम दर्ज भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

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