मुंबई/पुणे। महाराष्ट्र में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य के कई जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। राजधानी मुंबई, पुणे और आसपास के क्षेत्रों सहित कई जिलों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। वहीं तेज बारिश और तेज हवाओं के कारण अनेक स्थानों पर पेड़ उखड़कर गिर गए, जबकि कई जगहों पर दीवारें ढहने और मकानों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं भी सामने आई हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।
पिछले कुछ दिनों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में रुक-रुककर हो रही भारी वर्षा ने शहरों और कस्बों की रफ्तार थाम दी है। मुंबई में कई प्रमुख सड़कों पर पानी भर जाने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई स्थानों पर लंबा जाम लग गया और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगा। स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों की टीमें जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटी रहीं, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण राहत कार्यों में चुनौती बनी रही।
पुणे और उसके आसपास के इलाकों में भी बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। निचले इलाकों में जलभराव होने से कई कॉलोनियों और बाजारों में पानी भर गया। कुछ क्षेत्रों में घरों और दुकानों में भी बारिश का पानी घुस गया, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। नगर निगम की टीमें प्रभावित इलाकों से पानी निकालने और रास्तों को सुचारु करने में लगी हुई हैं।
तेज बारिश के साथ चली हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिरने की घटनाएं दर्ज की गईं। गिरे हुए पेड़ों की वजह से कुछ समय के लिए यातायात बाधित हुआ और बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। विद्युत विभाग तथा आपदा प्रबंधन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पेड़ों को हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने का कार्य शुरू किया। कई क्षेत्रों में एहतियात के तौर पर बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ी, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
बारिश के कारण कुछ इलाकों में दीवारें ढहने और पुराने मकानों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं भी सामने आई हैं। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी है और जर्जर भवनों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। राहत एवं बचाव दलों को भी सतर्क रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके मद्देनजर संबंधित जिलों के प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है। मछुआरों को भी समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि समुद्र में ऊंची लहरें उठने और मौसम खराब रहने की संभावना बनी हुई है।
लगातार बारिश का असर रेल और सड़क यातायात पर भी देखने को मिला। कुछ स्थानों पर जलभराव के कारण वाहनों की गति धीमी रही, जबकि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी दबाव बढ़ गया। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और दैनिक यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर प्रशासन ने यातायात को वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान शहरी क्षेत्रों में जलनिकासी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जल निकासी तंत्र पर बढ़ते दबाव के कारण भारी वर्षा के समय जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। ऐसे में दीर्घकालिक योजना के तहत जलनिकासी, नालों की नियमित सफाई और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है।
राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग, नगर निगम, पुलिस, दमकल और स्वास्थ्य विभाग की टीमें समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने नागरिकों से मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने, अफवाहों से बचने तथा किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करने की अपील की है।
मौसम विभाग के अनुसार यदि आगामी दिनों में बारिश का यही क्रम जारी रहता है तो कुछ और क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्रशासन ने सभी संबंधित एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा है ताकि किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके और जनहानि को न्यूनतम रखा जा सके।
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