नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने दावा किया है कि SIR के अलग-अलग चरणों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि करोड़ों मतदाताओं के नाम को लेकर अतिरिक्त सत्यापन और दस्तावेज की जरूरत बताई गई है।
जयराम रमेश के मुताबिक, SIR के पहले और दूसरे चरण में करीब 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो पुनरीक्षण से पहले की मतदाता सूची का लगभग 13 फीसदी है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनके बयान के अनुसार, तीसरे चरण में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया गया है।
तीसरे चरण में 6.18 करोड़ नाम हटने का दावा
कांग्रेस नेता ने कहा कि SIR का तीसरा चरण 2026 के मध्य में 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुआ। उनके द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में 36.06 करोड़ मतदाताओं में से करीब 6.18 करोड़ नाम हटाए गए।
जयराम रमेश ने दावा किया कि यह संख्या संबंधित मतदाता सूची का 17 फीसदी से अधिक है। हालांकि, ये आंकड़े कांग्रेस नेता द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं और इन्हें उसी दावे के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
निर्वाचन आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक तीसरे चरण में 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया था। आयोग ने बताया था कि इस चरण में करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचने के लिए 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों को लगाया गया।
5.43 करोड़ मतदाताओं के सत्यापन का दावा
जयराम रमेश ने यह भी दावा किया कि करीब 5.43 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं और उनसे मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं।
कांग्रेस नेता का कहना है कि यदि इन मतदाताओं का सत्यापन निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरा नहीं होता है तो इनके नाम भी मतदाता सूची से हटाए जाने की स्थिति बन सकती है। इसी आधार पर उन्होंने दावा किया कि नाम हटाए जाने और संभावित रूप से प्रभावित होने वाले मतदाताओं को मिलाकर करीब एक-तिहाई मतदाताओं पर असर पड़ सकता है।
राज्यों के आंकड़ों का भी जिक्र
जयराम रमेश ने अपने बयान में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़े भी पेश किए। उनके अनुसार दिल्ली, चंडीगढ़, तेलंगाना, झारखंड, हरियाणा, उत्तराखंड, मेघालय, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पंजाब में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सत्यापन या संभावित हटाए जाने की प्रक्रिया से जुड़े हैं।
हालांकि, SIR अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समय-सारणी के तहत चल रहा है। उदाहरण के तौर पर, निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम में दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड और मेघालय के लिए अंतिम मतदाता सूची का कार्यक्रम अक्टूबर 2026 में रखा गया है, जबकि कुछ अन्य राज्यों में अलग तारीखें निर्धारित हैं।
महिलाओं और कमजोर वर्गों को लेकर भी कांग्रेस का दावा
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के मतदाताओं पर इसका अधिक असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई बड़े राज्यों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के नाम अधिक संख्या में हटाए गए हैं।
इन दावों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग SIR को मतदाता सूची के पुनरीक्षण की निर्धारित प्रक्रिया के तौर पर संचालित कर रहा है और विभिन्न चरणों में मतदाताओं को दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने के अवसर दिए गए हैं। हरियाणा में उदाहरण के तौर पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।
सूची से नाम हटने पर क्या है प्रक्रिया?
SIR में मतदाता सूची के सत्यापन के बाद ड्राफ्ट सूची जारी की जाती है और संबंधित अवधि में दावे एवं आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया जाता है। इसके बाद आपत्तियों और दावों के निस्तारण के आधार पर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है।
निर्वाचन आयोग के SIR पोर्टल पर मतदाता अपने पुराने SIR रिकॉर्ड में नाम भी खोज सकते हैं। आयोग के पोर्टल पर राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र और अन्य विवरण के आधार पर खोज की सुविधा उपलब्ध है।
जयराम रमेश ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया में नागरिकों पर अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध कराने का बोझ डाला जा रहा है। उनका कहना है कि ऐसे दस्तावेज कई लोगों के पास उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।
उन्होंने SIR की आलोचना करते हुए इसे “शाह इंस्टीगेटेड रिमूवल” कहा और आरोप लगाया कि इससे बड़ी संख्या में मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। यह कांग्रेस नेता की राजनीतिक टिप्पणी और आरोप है; इसे निर्वाचन आयोग की आधिकारिक शब्दावली या निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR को लेकर आने वाले दिनों में दावे, आपत्तियां, सत्यापन और अंतिम मतदाता सूचियों के प्रकाशन के साथ तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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