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रूस में चुनाव के आखिरी दिन ड्रोन अटैक से दहला मॉस्को, 2 लोगों की मौत; ऑयल रिफाइनरी को भी नुकसान

मॉस्को। रूस में संसदीय चुनाव के अंतिम दिन मॉस्को और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए गए। रूसी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है, जबकि राजधानी की एक प्रमुख ऑयल रिफाइनरी को भी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों का दावा है कि शनिवार से अब तक रूस की ओर बढ़ रहे 1,600 से अधिक ड्रोन को मार गिराया गया है।

मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक, करीब 450 ड्रोन राजधानी मॉस्को की दिशा में बढ़ रहे थे। हमले के दौरान एक ड्रोन 21 मंजिला अपार्टमेंट इमारत से टकरा गया, जिसके बाद वहां आग लग गई। सुरक्षा के लिहाज से इमारत से करीब 400 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें लगभग 70 बच्चे भी शामिल थे।

ऑयल रिफाइनरी में भी लगी आग

ड्रोन हमले से मॉस्को की एक बड़ी ऑयल रिफाइनरी प्रभावित हुई। घटना के बाद वहां से धुआं उठता दिखाई दिया। अधिकारियों के मुताबिक, रिफाइनरी में नुकसान हुआ है, हालांकि यहां किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बढ़ी

रूस में शुक्रवार से संसदीय चुनाव के लिए मतदान जारी था। रविवार को मतदान का आखिरी दिन रहा। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू होने के बाद यह पहला संसदीय चुनाव है।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चुनाव को यूक्रेन में तैनात रूसी सैनिकों के लिए जनता के समर्थन से जोड़कर पेश किया है। चुनाव के नतीजों को रूस सरकार अपनी नीतियों और युद्ध को लेकर जनता के समर्थन के संकेत के तौर पर प्रस्तुत कर सकती है।

चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप का आरोप

रूसी अधिकारियों ने यूक्रेन पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया है। अधिकारियों के अनुसार, मॉस्को की ऑनलाइन वोटिंग प्रणाली पर साइबर हमला भी हुआ। हालांकि, साइबर हमले और अन्य घटनाओं के पीछे यूक्रेन की सीधी भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पुतिन ने रूसी नियंत्रण वाले जपोरिज्जिया क्षेत्र में एक चुनाव अधिकारी के घर पर हुए हमले का भी उल्लेख किया और इसमें अधिकारी की मौत का दावा किया। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

युद्ध विरोधी उम्मीदवारों को लेकर विवाद

रूस में चुनाव के दौरान यूक्रेन युद्ध का विरोध करने वाले कई नेताओं और उम्मीदवारों के सामने कानूनी और राजनीतिक बाधाएं रही हैं। कुछ विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार की कार्रवाई के डर के कारण युद्ध विरोधी आवाजें चुनाव में प्रभावी ढंग से सामने नहीं आ पा रही हैं।

रूस में सेना के बारे में ऐसी जानकारी प्रकाशित करने पर कार्रवाई का प्रावधान है जिसे सरकार गलत मानती है। इसी वजह से युद्ध और सरकार की नीतियों के विरोध को लेकर राजनीतिक गतिविधियों पर दबाव की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं।

चुनाव परिणामों पर रहेगी नजर

रविवार देर रात से शुरुआती चुनाव परिणाम सामने आने की उम्मीद है, जबकि पूर्ण परिणाम सोमवार तक स्पष्ट हो सकते हैं। चुनाव के दौरान ड्रोन हमले, साइबर हमले के आरोप और युद्ध के बीच आर्थिक दबाव जैसे मुद्दे रूस की राजनीतिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

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