तेल अवीव। करीब तीन साल से लगातार चल रहे सैन्य अभियानों का असर अब इजराइल की सेना के हथियारों और मानव संसाधन पर दिखाई देने लगा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लंबे समय तक चले युद्ध के कारण बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और सैन्य उपकरण इस्तेमाल हुए हैं। कई टैंकों के लगातार इस्तेमाल से उनके रखरखाव और उपलब्धता को लेकर भी दबाव बढ़ा है।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी कंपनी बोइंग से 12 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर खरीदने की योजना बजट से जुड़ी अड़चनों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इसे इजराइल के हथियार पूरी तरह खत्म होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि लंबे युद्ध के बाद सेना अपने घटे हुए सैन्य भंडार को फिर से निर्धारित स्तर तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
पांच अलग-अलग मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों का असर
अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद गाजा में शुरू हुआ सैन्य अभियान बाद में कई क्षेत्रों तक फैल गया। इजराइली सेना ने गाजा के अलावा लेबनान, ईरान, वेस्ट बैंक और सीरिया से जुड़े मोर्चों पर भी सैन्य कार्रवाई की।
इस दौरान टैंक, बख्तरबंद वाहन, मिसाइल, गोला-बारूद और दूसरे सैन्य संसाधनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि तीन साल की अवधि में इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद की मात्रा पिछले कई दशकों के कुल इस्तेमाल के बराबर बताई गई है।
हथियार खत्म होने के बजाय भंडार को दोबारा भरने की चुनौती
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार इजराइल के पास युद्ध जारी रखने के लिए हथियारों की तत्काल ऐसी कमी नहीं है कि उसकी सैन्य क्षमता समाप्त हो गई हो। समस्या मुख्य रूप से लंबे संघर्ष के दौरान इस्तेमाल और क्षतिग्रस्त हुए सैन्य संसाधनों की भरपाई से जुड़ी बताई जा रही है।
इजराइल लंबे समय से अपने सैन्य भंडार को जरूरत से अधिक स्तर पर रखने की नीति अपनाता रहा है। ऐसे में लगातार सैन्य अभियानों के बाद खर्च हुए हथियारों और उपकरणों को दोबारा हासिल करना उसके लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
अमेरिकी सैन्य सहायता के बावजूद नए सौदों पर दबाव
अमेरिका लंबे समय से इजराइल का प्रमुख सैन्य सहयोगी रहा है। अमेरिकी सहायता के जरिए इजराइल लड़ाकू विमानों, हथियारों और अन्य रक्षा उपकरणों की खरीद करता है।
रिपोर्टों में अपाचे हेलिकॉप्टरों की खरीद में देरी को बजट संबंधी अड़चन से जोड़ा गया है। ऐसे में आने वाले समय में पुराने उपकरणों के रखरखाव और नए सैन्य संसाधनों की खरीद पर अतिरिक्त खर्च का दबाव बढ़ सकता है।
सैनिकों की कमी भी बनी बड़ी चुनौती
इजराइली सेना के सामने केवल हथियारों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि पर्याप्त सैनिकों की व्यवस्था करना भी चुनौती है। लंबे युद्ध के कारण रिजर्व सैनिकों पर भी लगातार जिम्मेदारी बढ़ी है और सैन्य सेवा से जुड़े दबाव को लेकर देश में बहस तेज हुई है।
इसका एक प्रमुख मुद्दा हारेदी यानी अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी समुदाय के युवाओं की सैन्य भर्ती है। लंबे समय तक धार्मिक अध्ययन में लगे हारेदी पुरुषों को सैन्य सेवा से व्यापक छूट मिलती रही थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदला भर्ती नियम
2024 में इजराइल के सुप्रीम कोर्ट ने हारेदी पुरुषों को सामूहिक रूप से सैन्य सेवा से छूट देने के लिए कानूनी आधार नहीं होने की बात कही। इसके बाद उनकी भर्ती का मुद्दा और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया।
भर्ती को लेकर हारेदी धार्मिक नेताओं और समर्थकों की ओर से विरोध भी देखने को मिला। उनका कहना है कि सैन्य सेवा से धार्मिक अध्ययन और समुदाय की जीवनशैली प्रभावित होती है।
हजारों नोटिस के बावजूद सीमित संख्या में भर्ती
जुलाई 2025 में इजराइली संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सेना ने करीब 24 हजार हारेदी युवाओं को भर्ती नोटिस भेजे थे। इनमें लगभग 1,200 लोग भर्ती केंद्रों तक पहुंचे, जबकि 428 वास्तव में सेना में शामिल हुए। इनमें करीब 98 लड़ाकू भूमिकाओं में गए।
इससे साफ है कि लंबे सैन्य संघर्ष के बीच इजराइल के सामने सैन्य उपकरणों की भरपाई के साथ-साथ पर्याप्त सैनिकों की उपलब्धता का सवाल भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
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