बांग्लादेश में बिजली संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। कई इलाकों में रोजाना घंटों बिजली कटौती से आम जनजीवन के साथ अस्पतालों और उद्योगों पर भी असर पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर बैकअप जनरेटर के लिए ईंधन की कमी के कारण मरीजों की देखभाल तक मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में करनी पड़ी।
देश में इस समय करीब 3,000 से 3,500 मेगावाट बिजली की कमी बताई जा रही है। अगस्त में औसतन करीब 13 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन हुआ, जबकि मांग 16 हजार मेगावाट से अधिक रही। वर्ष 2022 के संकट की तुलना में मौजूदा कमी कई गुना अधिक बताई जा रही है।
गैस की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित
बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था में प्राकृतिक गैस की अहम भूमिका है। वर्ष 2024-25 में देश की करीब 44 प्रतिशत बिजली गैस आधारित संयंत्रों से बनी थी। घरेलू गैस उत्पादन में गिरावट के कारण कई प्लांट अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं।
घरेलू उत्पादन घटने के बाद बांग्लादेश ने LNG आयात पर निर्भरता बढ़ाई है। वहीं, LNG टर्मिनल में आई समस्या ने भी कुछ समय के लिए गैस आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया। हालांकि, हाल के दिनों में गैस उत्पादन और आपूर्ति में सुधार की रिपोर्ट सामने आई है।
कोयला आधारित प्लांट भी प्रभावित
सिर्फ गैस की कमी ही समस्या नहीं है। कई कोयला आधारित बिजली संयंत्र तकनीकी दिक्कतों के कारण पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। पाटुआखाली के बड़े बिजली संयंत्रों और रामपाल पावर प्लांट में उत्पादन क्षमता प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
इसका सीधा असर बिजली ग्रिड पर पड़ा है और मांग तथा उपलब्ध आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ गया है।
गारमेंट सेक्टर पर भी असर
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में गारमेंट उद्योग की बड़ी भूमिका है। बिजली और गैस की कमी से कपड़ा कारखानों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। कई फैक्ट्रियों में ऑर्डर कम होने, उत्पादन घटने और निर्यात में देरी की समस्या सामने आई है।
निटिंग, डाइंग और सिलाई इकाइयों में उत्पादन प्रभावित होने से कंपनियों की लागत बढ़ रही है और समय पर ऑर्डर पूरा करना मुश्किल हो रहा है। कुछ रिपोर्टों में सैकड़ों टेक्सटाइल इकाइयों में उत्पादन रुकने की बात भी कही गई है।
कई शहरों में घंटों कटौती
बांग्लादेश के मयमनसिंह, बारिशाल, रंगपुर, सिलहट, राजशाही और खुलना समेत कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ इलाकों में रोजाना 3 से 10 घंटे तक बिजली नहीं रहने की बात कही गई है।
बारिशाल के एक अस्पताल में जनरेटर का डीजल खत्म होने के बाद कर्मचारियों को मोबाइल की रोशनी में मरीजों की देखभाल करनी पड़ी। इस तरह की घटनाओं ने बिजली संकट के स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे असर को भी सामने ला दिया है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
बिजली संकट को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार ने मौजूदा स्थिति के लिए पिछली नीतियों और ऊर्जा व्यवस्था को जिम्मेदार बताया है, जबकि विपक्ष की ओर से मौजूदा प्रशासन पर कुप्रबंधन के आरोप लगाए गए हैं।
सरकार की ओर से लंबे समय में सौर ऊर्जा का विस्तार करने और आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने की योजना पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गैस उत्पादन बढ़ाने, बिजली संयंत्रों की तकनीकी समस्याएं दूर करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत विकसित करने से संकट को कम करने में मदद मिल सकती है।
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