नई दिल्ली। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को कंपनी की कमान आगे भी संभालने का रास्ता साफ हो गया है। टाटा संस के बोर्ड ने उन्हें पांच साल के नए कार्यकाल के लिए मंजूरी दे दी है। इसके बाद उनका कार्यकाल 2032 तक जारी रह सकता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ सप्ताह पहले ही चंद्रशेखरन ने अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा पद संभालने से इनकार किया था।
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना था। अगस्त 2026 में उन्होंने संकेत दिया था कि बोर्ड में सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के कारण वह दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया से पीछे हट रहे हैं। अब बोर्ड के नए फैसले से टाटा संस में नेतृत्व को लेकर बनी स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।
बोर्ड के फैसले से बदला नेतृत्व का समीकरण
एन. चंद्रशेखरन जनवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे। इससे पहले उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS में लंबा कार्यकाल पूरा किया था। टाटा संस के आधिकारिक दस्तावेजों में उन्हें एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर दर्ज किया गया है।
अगले पांच साल के कार्यकाल की मंजूरी ऐसे समय में मिली है, जब टाटा संस के स्वामित्व, प्रशासन और भविष्य की रणनीति को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, इसलिए चेयरमैन की नियुक्ति से जुड़े फैसले में ट्रस्ट्स की भूमिका अहम रहती है।
अगस्त में सामने आया था मतभेद का मुद्दा
अगस्त में चंद्रशेखरन ने अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा था कि उनके अगले कार्यकाल के प्रस्ताव को बोर्ड के एक सदस्य का समर्थन नहीं मिला था। उस समय उन्होंने कहा था कि फरवरी 2027 के बाद नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है, क्योंकि समूह कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
उस घटनाक्रम के बाद टाटा संस के अगले चेयरमैन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब पांच साल के नए कार्यकाल की मंजूरी से नेतृत्व परिवर्तन की पहले बनी तस्वीर बदल गई है।
टाटा संस के सामने लिस्टिंग का भी बड़ा मुद्दा
चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल के दौरान टाटा संस को नियामकीय और कारोबारी स्तर पर कई महत्वपूर्ण फैसले लेने होंगे। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में टाटा संस को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध होने की दिशा में आगे बढ़ने वाली नियामकीय स्थिति में रखा है। RBI ने कंपनी के उस अनुरोध को खारिज कर दिया था, जिसमें वह लिस्टिंग से छूट चाहती थी।
टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है, जिसके तहत TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया जैसे बड़े कारोबार जुड़े हैं। ऐसे में चेयरमैन के कार्यकाल का विस्तार समूह की भविष्य की रणनीति और नेतृत्व निरंतरता के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
चंद्रशेखरन के सामने आगे की बड़ी चुनौतियां
आने वाले वर्षों में टाटा समूह के सामने विमानन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल कारोबार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में निवेश और विस्तार की योजनाएं हैं। टाटा समूह की ओर से चंद्रशेखरन ने AI को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में भी रेखांकित किया है।
अब नए कार्यकाल के साथ चंद्रशेखरन के सामने इन कारोबारी योजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ टाटा संस की लिस्टिंग और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर भी काम करने की जिम्मेदारी होगी।
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