नई दिल्ली। भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ देश पर दुनिया का भरोसा भी लगातार मजबूत हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में स्थापित सेमीकंडक्टर प्लांट्स से निकलने वाली चिप्स अब घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने लगी हैं। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए केवल फैक्ट्री लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, उपकरण निर्माण और टेस्टिंग जैसी पूरी तकनीकी क्षमता विकसित करनी पड़ती है।
सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण पर जोर
प्रधानमंत्री के मुताबिक भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण शुरू किया है। पहले चरण में करीब 70,400 करोड़ रुपये की वैल्यू थी, जबकि दूसरे चरण के लिए लगभग 1.18 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का फोकस भारत में चिप निर्माण के साथ-साथ इससे जुड़े पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने पर है, ताकि देश वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका और मजबूत कर सके।
AI और नई तकनीकों के लिए चिप इकोसिस्टम जरूरी
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच नई सेमीकंडक्टर तकनीकों को विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कंपाउंड सेमीकंडक्टर और सिलिकॉन फोटोनिक्स जैसी तकनीकों को इकोसिस्टम में शामिल करने की आवश्यकता बताई।
इन तकनीकों को AI आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई-स्पीड कंप्यूटिंग और आधुनिक डिजिटल सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत में 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
सरकार के अनुसार देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अब तक 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें पहले चरण में मंजूर तीन इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की जानकारी दी गई है।
सरकार ने सेमीकॉन 2.0 को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य भारत में चिप निर्माण से लेकर डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग और अन्य संबंधित गतिविधियों का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।
600 से ज्यादा कंपनियां लेंगी हिस्सा
सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से ज्यादा प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं। कार्यक्रम में 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी भी बताई गई है।
इस आयोजन में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी प्रमुख वैश्विक और भारतीय कंपनियां निवेश, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगी।
जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के कंट्री पवेलियन भी प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे। कई भारतीय राज्यों की ओर से भी पवेलियन लगाए जाएंगे।
चिप डिजाइन में स्टार्टअप्स को बढ़ावा
भारत सरकार चिप निर्माण के साथ-साथ स्वदेशी चिप डिजाइन को भी बढ़ावा दे रही है। सरकारी जानकारी के अनुसार 400 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों और 105 स्टार्टअप्स को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी EDA टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं।
इसके अलावा 24 स्टार्टअप्स को डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के तहत मंजूरी मिली है। इसका उद्देश्य देश में चिप डिजाइन और उससे जुड़ी तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करना है।
वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका
भारत सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन को विकसित करने पर काम कर रहा है। इसमें चिप डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़े क्षेत्रों को शामिल किया जा रहा है।
इसका प्रमुख उद्देश्य महत्वपूर्ण तकनीकों और चिप्स के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना तथा देश में मैन्युफैक्चरिंग, निवेश, रोजगार और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार नीति, फंडिंग और रेगुलेटरी सपोर्ट के जरिए सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर काम कर रही है। विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय स्टार्टअप्स, डिजाइन फर्म्स और अन्य संस्थाओं के साथ सहयोग के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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